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मेरे लिए 'मन की बात' लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थ यात्रा: पीएम मोदी

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम को लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थयात्रा बताया है। रविवार को 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के ही स्वरूप हैं।
 

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम को लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थयात्रा बताया है। रविवार को 139वें एपिसोड में प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के ही स्वरूप हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, "आज से 12 वर्ष पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हमने 'मन की बात' की शुरुआत की थी। तब से अब तक हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है। इस यात्रा के सहयात्री भी आप हैं और मार्गदर्शक भी आप ही हैं।"

उन्होंने कहा, "मेरे लिए 'मन की बात' देश के सामान्य मानवी के परिश्रम, उसके पराक्रम, उसकी प्रतिबद्धता, उसके समर्पण और सेवा-भाव का गौरवगान करने का एक शुभ अवसर रहा है हमारे देश में सदियों से तीर्थ यात्रा की परंपरा रही है, मेरे लिए 'मन की बात' भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने की और उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के ही स्वरूप हैं। 12 वर्षों में देश के हर कोने से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं जिनकी असाधारण कार्यों की ओर सामान्य रूप से समाज का ध्यान नहीं जाता। 'मन की बात' ने ऐसी अनगिनत प्रेरक कहानियों को आप सब के सामने लाने का काम किया है।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "मैं इस कार्यक्रम के माध्यम से एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करता हूं। मुझे इसके माध्यम से देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है। मुझे सैकड़ों ऐसे संदेश मिलते हैं, जिनमें लोग बताते हैं कि 'मन की बात' सुनकर उन्हें ऐसा लगता है, जैसे मैं उनके बीच उनके परिवार में बैठकर एक परिवार के सदस्य की तरह उन सबसे संवाद कर रहा हूं। मेरे लिए आप सभी श्रोताओं की ये आत्मीयता, आपका ये स्नेह बहुत अमूल्य पूंजी है।"

--आईएएनएस

डीसीएच/