मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द विवाद पर कांग्रेस बोली, सुधार का मौका मिलना चाहिए
नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के मामले को लेकर कांग्रेस विधायक भाई जगताप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए इस फैसले को गलत बताया।
भाई जगताप ने कहा कि वे खुद लंबे समय से चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं और उन्होंने कई चुनाव लड़े हैं। उनका कहना है कि अगर नामांकन में कोई कमी या गलती होती है तो उसे सुधारने का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी उम्मीदवार के दस्तावेजों में कोई त्रुटि है तो उसे सुधारने का अवसर दिए बिना नामांकन कैसे रद्द किया जा सकता है?
उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सबसे जरूरी है। यदि किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में फैसला लिया जाता है तो इससे जनता के मन में संदेह पैदा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के फैसलों से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठते हैं और लोगों के बीच शक की स्थिति बनती है।
भाई जगताप ने यह भी कहा कि वे किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन यह जरूर है कि इस तरह की घटनाएं लोगों के मन में असंतोष पैदा करती हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी नागरिक को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है तो उसके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है। लोकतंत्र में हर किसी को न्याय पाने का हक है, इसलिए इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाएगा।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जिसमें पीएम ने कहा था कि कांग्रेस की नाकामियों से देश को उबारते हुए भारत को विकास की राह पर आगे ले जाना एक बड़ी उपलब्धि है। इस पर भाई जगताप ने कहा कि 2014 से पहले देश जिस दिशा में आगे बढ़ रहा था, उसे खराब बताना सही नहीं है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति मजबूत थी और कई क्षेत्रों में प्रगति हो रही थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने कई मोर्चों पर विफलता दिखाई है।
भाई जगताप ने खास तौर पर युवाओं के मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं का भविष्य खतरे में है, खासकर परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने नीट परीक्षा को लेकर कहा कि बार-बार पेपर लीक होना गंभीर समस्या है। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाओं से छात्रों का भरोसा टूटता है और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इन समस्याओं को रोकने में नाकाम रही है। उनका कहना है कि अगर पहले ही सख्त कदम उठाए जाते तो आज स्थिति इतनी खराब नहीं होती। उन्होंने सरकार पर 'जुमलों की राजनीति' करने का आरोप भी लगाया और कहा कि जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं होती, बल्कि ठोस काम चाहती है।
इसके अलावा कांग्रेस और टीएमसी के संभावित मर्जर या गठबंधन की अफवाहों पर भी भाई जगताप ने अपनी राय दी। उन्होंने साफ कहा कि फिलहाल किसी औपचारिक मर्जर की बात नहीं है, लेकिन यह जरूर है कि विपक्षी दलों को मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि जो भी दल सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ना चाहते हैं, उन्हें एकजुट होना चाहिए। खासकर उन मुद्दों पर, जिनमें महंगाई, बेरोजगारी, महिलाओं पर अत्याचार और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवाल शामिल हैं। उनका कहना है कि बिखरी हुई लड़ाई से फायदा नहीं होगा, इसलिए मिलकर रणनीति बनाना जरूरी है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, यानी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ही लेंगे। स्थानीय स्तर पर इस तरह के फैसले नहीं किए जाते।
--आईएएनएस
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