‘एमबीसी’ के जरिए ड्रोन व रडार टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देगी भारतीय वायु सेना
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय वायु सेना आधुनिक ड्रोन व रडार टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही है। वायु सेना ने इस स्वदेशी डिफेंस टेक्नोलॉजी को गति देने के लिए ‘मेहर बाबा प्रतियोगिता-3’ (एमबीसी-3) की शुरुआत की है। यह एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है जिसके लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। वायुसेना की यह पहल देश में उन्नत ड्रोन और रडार तकनीक को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम 'कोलैबोरेटिव ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस रडार्स’, है। इस पूरे आयोजन का लक्ष्य ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करना है, जिसमें कई मानव रहित हवाई प्रणालियां एक साथ मिलकर कार्य करें और एक हवाई रडार नेटवर्क का रूप ले लें। यह ड्रोन समूह (स्वॉर्म) न केवल हवाई लक्ष्यों का पता लगाने में सक्षम होगा, बल्कि उन्हें ट्रैक कर उनकी सटीक लोकेशन एक केंद्रीकृत निगरानी केंद्र तक वास्तविक समय में भेज सकेगा। खास बात यह है कि यह तकनीक विरोधी या चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए विकसित की जाएगी।
दरअसल यह आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप भी है। वायुसेना का कहना है कि मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 का मुख्य उद्देश्य स्वदेशी स्तर पर उन्नत रक्षा तकनीकों का विकास करना है। ड्रोन और रडार के एकीकृत उपयोग की नई संभावनाओं की खोजना, उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमिक संस्थानों को रक्षा क्षेत्र से जोड़ना व भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के लिए स्मार्ट और किफायती समाधान तैयार करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। यह प्रतियोगिता एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट तैयार करने पर केंद्रित है, जिससे आगे चलकर इसे वास्तविक सैन्य उपयोग में बदला जा सके।
भारतीय वायु सेना ने इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए देश के रक्षा और तकनीकी उद्योग, स्टार्ट-अप, शैक्षणिक संस्थान व अनुसंधान एवं विकास संगठन को आमंत्रित किया है। इच्छुक प्रतिभागी प्रतियोगिता से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश और तकनीकी आवश्यकताओं की जानकारी आधिकारिक ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रतियोगिता में चयनित प्रतिभागियों को भारतीय वायु सेना की ओर से विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली शीर्ष तीन टीमों को आकर्षक पुरस्कार और सम्मान भी दिए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था प्रतिभागियों को न केवल नवाचार के लिए प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें अपने विचारों को वास्तविक उत्पाद में बदलने का अवसर भी देती है। इस प्रतियोगिता की घोषणा पहले एयरो इंडिया 2025 के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा की गई थी। वहीं मेहर बाबा प्रतियोगिता के पहले दो संस्करण भी अत्यंत सफल रहे हैं। पहला संस्करण, आपदा राहत और मानवीय सहायता के लिए स्वॉर्म ड्रोन पर केंद्रित था।
वहीं, दूसरा संस्करण हवाई पट्टियों पर अज्ञात वस्तु या मलबे की पहचान के लिए ड्रोन पर आधारित था। इन प्रतियोगिताओं को उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमिक जगत से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इनके माध्यम से देश में मानव रहित प्रणालियों के क्षेत्र में एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ और लगभग 2000 करोड़ रुपये के ऑर्डर उत्पन्न हुए। साल 2018 में शुरू हुई मेहर बाबा प्रतियोगिता आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है। यह पहल नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा देती है। साथ रक्षा उपयोगकर्ताओं और डेवलपर्स के बीच समन्वय स्थापित करती है।
इस प्रतियोगिता का नाम महान वायु योद्धा व प्रथम महावीर चक्र विजेता एयर कमोडोर मेहर सिंह के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें ‘मेहर बाबा’ के नाम से जाना जाता था। उनका जन्म 1915 में लायलपुर (अब पाकिस्तान में) हुआ था। वे 1934 में रॉयल एयर फोर्स कॉलेज, क्रैनवेल से प्रशिक्षित हुए। अपनी असाधारण उड़ान क्षमता और नेतृत्व के कारण उन्होंने कम उम्र में ही ख्याति प्राप्त कर ली थी। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में कई ऐतिहासिक मिशनों का नेतृत्व भी किया।
--आईएएनएस
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