Aapka Rajasthan

बेटी बेमिसाल : कॉरपोरेट जॉब छोड़ खुशबू पाटिल लौटीं गांव, स्टार्टअप से बनीं आत्मनिर्भरता और ग्रामीण रोजगार की नई मिसाल

बुरहानपुर, 7 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की 24 वर्षीय खुशबू पाटिल ने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुना। उन्होंने स्थानीय स्तर पर केले के चिप्स का स्टार्टअप शुरू किया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए सरकारी योजनाओं की तारीफ की और सरकार को धन्यवाद भी दिया।
 

बुरहानपुर, 7 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव की 24 वर्षीय खुशबू पाटिल ने कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर स्वरोजगार का रास्ता चुना। उन्होंने स्थानीय स्तर पर केले के चिप्स का स्टार्टअप शुरू किया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए सरकारी योजनाओं की तारीफ की और सरकार को धन्यवाद भी दिया।

खुशबू ने एमबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद देश की बड़ी निजी कंपनियों में काम किया, लेकिन बाद में अपने गांव लौटकर स्थानीय संसाधनों के आधार पर व्यवसाय शुरू करने का फैसला लिया। आज उनका यह प्रयास न केवल सफल हो रहा है, बल्कि गांव के कई लोगों के लिए रोजगार का भी माध्यम बन गया है।

खुशबू पाटिल ने बताया, "मैंने मार्केटिंग में एमबीए करने के बाद करीब दो वर्ष तक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब किया। मैंने सोचा कि अपने गांव लौटकर कुछ ऐसा किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल सके। बुरहानपुर केले के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, इसलिए मैंने केले के चिप्स बनाने का उद्योग शुरू करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान से उन्हें स्वरोजगार की प्रेरणा मिली। साथ ही सरकार की एक योजना के तहत मिली सब्सिडी ने उनके स्टार्टअप को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।"

उन्होंने सरकार का आभार जताते हुए कहा, "यदि युवा सरकारी योजनाओं का सही तरीके से लाभ उठाएं तो वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।"

खुशबू ने कहा, "मैंने केला चिप्स का व्यवसाय शुरू किया है। सरकार से मिली सब्सिडी के कारण इस काम की शुरुआत करना आसान हुआ। मेरा मानना है कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।"

खुशबू के पिता युवराज पाटिल ने कहा, "देश में करोड़ों युवा हैं और सभी को सरकारी या निजी नौकरी मिल पाना संभव नहीं है। ऐसे में स्वरोजगार ही भविष्य का मजबूत विकल्प बन सकता है। सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है, जिनका अधिक से अधिक लोगों को लाभ उठाना चाहिए।"

स्टार्टअप में कार्यरत किशोर चौधरी ने बताया, "मुझे केले से जुड़े कार्य का 15 से 20 वर्षों का अनुभव है। इस स्टार्टअप से उन्हें और अन्य ग्रामीणों को रोजगार मिला है। वर्तमान में करीब 20 लोग इस यूनिट में काम कर रहे हैं। अब केले से अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, जिससे भविष्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।"

गांव के लोगों ने भी खुशबू के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उनके इस कदम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम