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मायावती का परिवारवाद पर बड़ा प्रहार, बोलीं- बीएसपी में रिश्तेदारों की सियासत को नहीं मिलेगी जगह

लखनऊ, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और आगामी विधानसभा चुनावों में युवाओं तथा सर्वसमाज की प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर देते हुए परिवारवाद के मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। मायावती ने साफ कहा कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने का मतलब यह नहीं होगा कि उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी राजनीतिक लाभ दिया जाए।
 

लखनऊ, 12 सितंबर (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने पार्टी संगठन और आगामी विधानसभा चुनावों में युवाओं तथा सर्वसमाज की प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने की नीति पर जोर देते हुए परिवारवाद के मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाया है। मायावती ने साफ कहा कि पार्टी में किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने का मतलब यह नहीं होगा कि उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी राजनीतिक लाभ दिया जाए।

उन्होंने अपने भाई आनंद कुमार के परिवार के संदर्भ में भी स्पष्ट किया कि उनके दोनों बेटों और आगे उनके बच्चों को बीएसपी में राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) द्वारा पूरे देश भर में व ख़ासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को तरजीह देने की नीति के तहत जेन-जी को लगभग पचास प्रतिशत तक पार्टी संगठन में भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया काफी लम्बे समय से जारी है, लेकिन अब यूपी, उत्तराखण्ड एवं पंजाब विधानसभा आमचुनाव आदि में भी सर्वसमाज के कर्मठ व युवा प्रतिभाओं को पार्टी उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश पर भी अमल जारी है, ताकि नई पीड़ी के ज़रिये देश में आपेक्षित अम्बेडकरवादी राजनीति एवं संवैधानिक मूल्यों का तेज़ी से विकास हो सके।

उन्होंने लिखा कि भारतीय संविधान का मानवतावादी, समतामूलक व सेक्युलर उद्देश्य ज़मीन पर लागू हो सके और सभी लोग सही से फल-फूल सकें, जैसा कि यूपी में बीएसपी की चार बार रही सरकारों में क़ानून के आयरन लेडी राज के साथ ही जनहित, जनकल्याण एवं विकास आदि के मामलों में बेहतरीन सरकार होना साबित रहा है।

मायावती ने कहा कि इस क्रम में, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य सम्बंधी लोगों की अहम ज़रूरतों के साथ ही सरकारी नौकरी, रोज़गार, स्कूल, अस्पताल, शहरी व ग्रामीण विकास आदि के साथ ही 'जेन-जी' व 'जेन-अल्फा' की भी बुनियादी ज़रूरतों पर मज़बूत इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया गया और जिस क्रम में अनेकों स्कूल, कालेज, यूनिवर्सिटी, छात्रावास, ट्रेनिंग सेन्टर व पार्क आदि की स्थापना की गयी और इन प्रयासों के कारण लोगों का मजबूरी का पलायन होना भी काफी रूका है, जिससे कोई इंकार नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा कि किन्तु विरोधी पार्टियों के घोर जातिवादी रवैयों के कारण बीएसपी की सरकार सन 2012 में पांचवी बार यहां सत्ता में नहीं आ सकी, जिसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को अभी तक भी है, क्योंकि बीएसपी सरकार के जाने के बाद से यहां पूरे प्रदेश में क़ानून द्वारा क़ानून का राज कायम नहीं होने से लोगों का जीवन दुखी ही नहीं बल्कि काफी त्रस्त भी बना हुआ है तथा विकास का सरकारी ढिंढोरा लोगों का पेट भी सही से नहीं भर पा रहा है।

मायावती ने कहा कि ऐसे में पार्टी के लोगों को फिर से यह कहना है कि वे बीएसपी का उम्मीदवार चुनते समय सर्वसमाज के अच्छे लोगों को ही चुनें तथा युवा वर्ग को भी प्राथमिकता दें, जिसमें महिला व पुरुष दोनों होने चाहिए, तो यह उचित होगा। इसके साथ ही, यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बीएसपी द्वारा उन्होंने कहा कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के जिस कारवां को लगातार मजबूत करने व आगे बढ़ाकर सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करके 'अपना उद्धार स्वंय करने योग्य' बनाने के मिशन की बात है तो इसकी सफलता हेतु किसी का भी रोड़ा बनना मुझे कतई भी स्वीकार नहीं है, अर्थात मुझे केवल अपने 'बहुजन समाज परिवार' के हित, कल्याण व उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने की ही रात-दिन चिन्ता रहती है, अपने किसी भी सगे भाई-बहन व उनके परिवार के युवा सदस्यों, तथा नज़दीकी रिश्ते-नातों आदि को भी कांशीराम की तरह मैंने भी, उन्हें पार्टी के कार्यों तक सीमित करके उन्हें सांसदी, विधायकी, मंत्री पद व अन्य किसी भी राजनैतिक लाभआदि के पदों से हमेशा दूर रखा है।

मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि मेरे अविवाहित होने के नाते मुझे मजबूरी में, अपने सभी सगे भाई-बहनों में से किसी एक को और अन्ततः सबसे छोटे भाई आनन्द कुमार को अपने साथ रखने की भी ज़रूरत पड़ी है जो यह मेरी देखभाल करने के साथ-साथ मेरी पूरी निगरानी में पार्टी की अहम ज़िम्मेदारियों को भी काफी लम्बे समय से निभा रहे हैं, लेकिन इसका लाभ अब उनके परिवार के लोग भी उठायें तो यह पार्टी व मूवमेन्ट के हित में सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इसीलिए आज मेरा अन्तिम यही फैसला व प्रतिज्ञा भी है कि इसके एवज में, अब इनके ख़ासकर किसी भी बेटे को बीएसपी में किसी भी छोटे-बड़े पद पर बने रहकर राजनीति करने का मौका नहीं दिया जायेगा। यदि आगे चलकर मेरे साथ रहते हुये आनन्द कुमार को मेरी मदद के लिए किसी और सदस्य की भी ज़रूरत पड़ती है तो फिर वह वर्तमान राजनैतिक हालात में केवल अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनन्द को, जो इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही है, उसे आगे चलकर उसकी मदद ले सकते हैं और फिर उसकी ईमानदारी, वफादारी व कार्य क्षमता आदि को देखकर पार्टी में उसे ज़रूरतानुसार अपनी खुद की ज़िम्मेवारी भी सौंप सकते हैं, लेकिन वे अपने दोनों बेटों को व आगे चलकर उनके युवा बच्चों में से किसी को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौपेंगे।

साथ ही, यह भी कहना है कि अपनी बेटी के तैयार नहीं होने पर फिर वे पार्टी की आम सहमति से केवल पार्टी के दलित वर्ग में से ही अन्य किसी मिशनरी कार्यकर्ता को भी अपनी यह ज़िम्मेवारी सौंप सकते हैं अर्थात् अपने किसी भी बेटे को व उनके बच्चों के बड़े होने पर उन्हें भी यह ज़िम्मेवारी नहीं सौंपेंगे। यही वर्तमान में समय की जरुरत है व पार्टी के हित में भी है। उन्होंने कहा कि ताकि मान्यवर कांशीराम जी जिस प्रकार से 'परिवारवाद' आदि के विरुद्ध कायम रहे, उनकी शिष्या होने के नाते मैं भी उसी प्रकार से पूरी तरह डटी हूं और जैसा कि मैंने काफी कुछ इस पर अमल करके भी दिखाया है और यदि मैं लड़की नहीं होती, तो मैं फिर कांशीराम की तरह ही अपने भाई-बहिनों आदि में से किसी को भी अपने साथ नहीं रखती। लेकिन मैं लड़की होने की वजह से अपनी सुरक्षा सम्बन्धी, हर परेशानी से मुक्त होकर व पूरे मान-सम्मान के साथ पार्टी में आगे बढ़ती रहूं तभी मुझे अपने सबसे छोटे भाई आनन्द कुमार को मजबूरी में अपने साथ रखना पड़ा है और अब इनके बच्चों के बड़े व शादीशुदा होने पर काफी कुछ मुझे भी झेलना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी मैं किसी के भी मोह आदि के चक्कर में ना पड़कर पार्टी को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचने दूंगी।

मायावती ने कहा कि इसी प्रकार पार्टी संगठन में व आगे सरकार बनने पर भी, चाहे वह कोई भी हो, केवल सम्बन्धित उसी एक व्यक्ति को ही मौक़ा दिया जायेगा, लेकिन उसकी आड़ में उसके परिवार के अन्य किसी भी सदस्य को कोई भी लाभ आदि नहीं दिया जायेगा, ताकि बीएसपी अब आगे परिवारवाद से मुक्त रहे तथा सर्वसमाज में से आन्दोलन के सहभागी बन सकें, जो कि अम्बेडकरवादी राजनीति ज़्यादा से ज़्यादा लोग 'सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति' के लिये बहुत ज़रूरी है।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही बीएसपी के लोगों से यह भी कहना है कि वे बीएसपी विरोधी पार्टियों/संगठनों तथा जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया आदि के भी विषैले एवं साज़िशी तथा प्रायोजित व पेड प्रोपेगण्डा आदि से ज़रूर सावधान रहें क्योंकि इनका मक़सद केवल साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के घिनौने हथकण्डे अपनाकर बीएसपी को यूपी में सरकार बनाने से रोकना है, जिसे किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना है और इन्हें पूरे तन, मन, धन से लगातार अपने अम्बेडकरवादी मिशन में लगे रहना है, इसी में ही सबकी भलाई है यानी कि व्यापक देश व जनहित निहित है।

मायावती ने कहा कि उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया आदि में यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता अपनाने व पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने आदि के कारण बीएसपी से निष्कासित लोगों को वापस लिया जायेगा। यह पूरी तरह से ग़लत एवं मिथ्या प्रचार है, यानी कि यह फेक न्यूज़ है, अर्थात ऐसे लोगों को बीएसपी में कतई भी वापस नहीं लिया जायेगा।

--आईएएनएस

विकेटी/डीएससी