Aapka Rajasthan

मावलिननोंन विलेज: शांत और स्वच्छ गांव, जहां पानी के तल में बैठे पत्थर भी चमकते हैं

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में कई ऐसे इलाके हैं, जहां प्रकृति के नजारों और संस्कृति की बेहतरीन छटा देखने को मिलती है। हरे-भरे पहाड़ और नदियों का साफ और झरझरता पानी पर्यटकों का मन मोह लेता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेघालय में एक ऐसा छोटा सा गांव मौजूद है, जो अपनी प्रकृति के साथ-साथ साफ-सफाई के लिए जाना जाता है और एशिया के सबसे साफ-सुथरे गांवों में शामिल है? हम बात कर रहे हैं मावलिननोंग गांव की।
 
मावलिननोंन विलेज: शांत और स्वच्छ गांव, जहां पानी के तल में बैठे पत्थर भी चमकते हैं

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में कई ऐसे इलाके हैं, जहां प्रकृति के नजारों और संस्कृति की बेहतरीन छटा देखने को मिलती है। हरे-भरे पहाड़ और नदियों का साफ और झरझरता पानी पर्यटकों का मन मोह लेता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेघालय में एक ऐसा छोटा सा गांव मौजूद है, जो अपनी प्रकृति के साथ-साथ साफ-सफाई के लिए जाना जाता है और एशिया के सबसे साफ-सुथरे गांवों में शामिल है? हम बात कर रहे हैं मावलिननोंग गांव की।

मेघालय के पूर्वी खासी हिल्स जिले में एक बेहद खूबसूरत, शांत और प्रकृति की गोद में बसा मावलिननोंग गांव है, जिसे साल 2003 में 'एशिया का सबसे स्वच्छ गाँव' का खिताब मिला था और साल 2005 में भारत का सबसे साफ-सुथरा गांव घोषित किया गया था। अपनी खूबसूरती और स्वच्छता के कारण ही गांव को "भगवान का अपना बगीचा" भी कहकर बुलाया जाता है। सफाई के मामले में यह गांव पूरे देश के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया के लिए मिसाल है और गौर करने वाली बात यह भी है कि इस गांव में साक्षरता दर भी 100 फीसदी है।

मावलिननोंन गांव की खूबसूरती को बनाए रखने में वहां के स्थानीय लोगों का बड़ा हाथ है। स्थानीय लोग ही घर के आस-पास बांस से बने कूड़ेदान लगाते हैं और सड़कों की निरंतर सफाई करते रहते हैं। इस गांव की आबादी लगभग 600 लोगों की है, और अपने पूरे गांव को साफ-सुथरा रखना हर किसी की जिम्मेदारी है। बात सिर्फ गांव को साफ-सुथरा रखने की नहीं है, बल्कि गांव के लोग प्रकृति को भी संजोकर रखते हैं, और यही कारण है कि वहां की सदियां शीशे की तरह साफ हैं।

गांव में घूमने आने वाले पर्यटकों को नदी के अंदर तल पर रखा पत्थर भी साफ तरीके से दिख जाता है। मावलिननोंन गांव पर्यावरण को भी बचाने का काम करता है। वहां प्लास्टिक के उपयोग पर पाबंदी है और कूड़ेदान भी बांस के बने इस्तेमाल होते हैं। वहां पत्तों और घरों से निकलने वाले जैविक कचरे को एक गड्ढे में डाल देते हैं और ऑर्गेनिक खाद बनाते हैं। वहां के बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रकृति के साथ जोड़ना शुरू कर दिया जाता है। बच्चों के हाथों से पेड़ लगवाए जाते हैं और सड़कों की सफाई भी कराई जाती है।

अगर आप किसी शांत और सुकून भरी जगह पर घूमने का प्लान कर रहे हैं तो मावलिननोंन गांव जा सकते हैं। यहां बांस और घास से बने घर और शांत झरने पर्यटकों का दिल जीतने के लिए काफी हैं। यहां होम स्टे की सुविधा भी उपलब्ध है। गौर करने वाली बात है कि गांव की एंट्री फीस 100 रूपए प्रति व्यक्ति है। अगर आप शिलांग से मावलिननोंन गांव पहुंचना जानते हैं, तो वहां से गांव की दूरी 80 किलोमीटर है। शिलांग से आसानी से बस और टैक्सी की सेवा उपलब्ध है।

--आईएएनएस

पीएस/पीएम