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मौलाना जर्जिस के बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया, 'शब्दों के चयन में सावधानी बरतें'

लखनऊ, 2 नवंबर (आईएएनएस)। मौलाना जर्जिस के उस बयान पर विवाद गहराता नजर आ रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश को दूसरा फिलिस्तीन नहीं बनना चाहिए। उनके इस बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं और इस्लामिक विद्वानों ने प्रतिक्रिया दी।
 

लखनऊ, 2 नवंबर (आईएएनएस)। मौलाना जर्जिस के उस बयान पर विवाद गहराता नजर आ रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश को दूसरा फिलिस्तीन नहीं बनना चाहिए। उनके इस बयान पर मुस्लिम धर्मगुरुओं और इस्लामिक विद्वानों ने प्रतिक्रिया दी।

रामपुर में मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने मौलाना जर्जिस से अपनी भाषा और शब्दों के चयन में सावधानी बरतने की अपील की। लखनऊ में शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने बयान को निंदनीय और अफसोसजनक बताया। वहीं, मुरादाबाद में मुफ्ती इंतजाब कादरी ने भी फिलिस्तीन से उत्तर प्रदेश के मुसलमानों की तुलना को गलत करार दिया। धर्मगुरुओं ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर भावनात्मक और विवादित भाषा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

मौलाना मोहम्मद जमील हयात ने मौलाना जर्जिस से अपील की कि वे बोलते समय अपने शब्दों का खास ध्यान रखें। वह पहले भी एक अहल-ए-हदीस विद्वान से मौलाना जर्जिस की भाषा को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर चुके हैं। मौलाना जर्जिस अक्सर ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जो उचित नहीं होती। जज्बाती बातें और गलत शब्द किसी को करीब लाने के बजाय दूर कर सकते हैं। एक आलिम की जुबान में मिठास और अपनापन होना चाहिए। धार्मिक विद्वानों को मोहब्बत की बातें करनी चाहिए और लोगों को प्यार से समझाना चाहिए।

उन्होंने पैगंबर मोहम्मद साहब का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने सभी लोगों को साथ लेकर चलने की शिक्षा दी। पड़ोसी गैर-मुस्लिम हो, तब भी उसके प्रति हमदर्दी रखने का संदेश दिया। मौलाना ने कहा कि दीन और इस्लाम से दूर लोगों को भी मोहब्बत और समझाने-बुझाने के जरिए करीब लाया जा सकता है। कठोर और भावनात्मक बयान इस उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकते।

शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने मौलाना जर्जिस के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौलाना जर्जिस अक्सर विवादित बयान देते हैं और इस तरह मीडिया में बने रहना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के डरने संबंधी टिप्पणी पर मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि मुसलमान किसी से नहीं डरता, वह केवल अल्लाह से डरता है। उन्होंने फिलिस्तीन का उदाहरण देकर भारत के हालात की तुलना करने को अफसोसजनक और निंदनीय बताया।

उन्होंने कहा कि भारत में संविधान है और यहां सभी मामले संवैधानिक व्यवस्था के तहत चलते हैं। मौलाना सैफ अब्बास ने सवाल उठाया कि फिलिस्तीन की परिस्थितियों को भारत से जोड़कर इस तरह की बातें कहना उचित नहीं है। भारत एक बड़ा और ताकतवर देश है तथा यहां ऐसी स्थिति की कल्पना करना भी सही नहीं है। उन्होंने मौलाना जर्जिस के बयान को निराशाजनक बताया।

मुरादाबाद में मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती इंतजाब कादरी ने भी मौलाना जर्जिस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि मौलाना जर्जिस स्वयं डरे हुए हैं तो इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते, लेकिन उन्हें उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में मुसलमानों के डरे या सहमे होने जैसी स्थिति नजर नहीं आती। सच्चा ईमान रखने वाला व्यक्ति केवल अल्लाह से डरता है। भारत में मुसलमान अमन और शांति के साथ रह रहे हैं और अपनी हलाल की रोजी कमा रहे हैं। वह देश के अलग-अलग हिस्सों में जाते हैं, लेकिन उन्हें कहीं भी मुसलमानों में ऐसा डर दिखाई नहीं दिया।

उन्होंने भारत के मुसलमानों की तुलना फिलिस्तीन के मुसलमानों से करने को गलत बताते हुए कहा कि भारतीय मुसलमान किसी राजनीतिक व्यक्ति के पीछे नहीं चलता, बल्कि अल्लाह के वलियों और बुजुर्गों की रहनुमाई को महत्व देता है। उन्होंने गरीब नवाज, साबिर पाक और अन्य बुजुर्गों का जिक्र करते हुए कहा कि मुसलमानों का भरोसा धार्मिक मार्गदर्शन पर है।

मुफ्ती ने कहा कि मुसलमानों की परेशानियां आज की नहीं हैं। समुदाय लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना करता आया है और अब उनसे निपटना भी सीख चुका है। पिछले दिनों मुसलमानों में एक नई सोच, विश्वास और कुछ कर गुजरने का हौसला पैदा हुआ है। किसी भी सरकार से मुसलमानों के भले की उम्मीद करने के बजाय समुदाय को अपने विकास के लिए खुद प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई सरकार किसी मुसलमान को प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री बना देगी? मुसलमानों को यह सोचना चाहिए कि वे अपनी स्थिति बेहतर बनाने के लिए खुद क्या कर सकते हैं। उन्होंने समुदाय की एकजुटता पर जोर देते हुए कहा कि एकजुट रहना जरूरी है।

सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए मुफ्ती इंतजाब कादरी ने कहा कि राशन, सड़क और बिजली जैसी सुविधाओं का लाभ दूसरे समुदायों की तरह मुसलमानों को भी मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि मुसलमान मौजूदा सरकार के दौर में भी शांति से जीवन बिता रहे हैं। मुफ्ती ने उत्तर प्रदेश की सड़कों की तारीफ करते हुए कहा कि वह पूरे देश में सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं। प्रदेश की सड़कें उन्हें देश में सबसे अच्छी नजर आती हैं। उन्होंने महाराष्ट्र और नागपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की सड़कें भी उन्हें उत्तर प्रदेश जितनी बेहतर नहीं लगीं।

उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की बयानबाजी से हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सकता है। दोनों समुदायों को आपस में लड़ाने के बजाय शांति और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम