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मतदाता सूची पर विपक्ष के आरोप निराधार, प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी: राकेश सचान

लखनऊ, 27 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सचान ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और चुनाव आयोग के नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
 
मतदाता सूची पर विपक्ष के आरोप निराधार, प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी: राकेश सचान

लखनऊ, 27 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री राकेश सचान ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और चुनाव आयोग के नियमों के तहत संचालित की जा रही है।

यूपी सरकार में मंत्री राकेश सचान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि वह स्वयं विधानसभा स्तर पर लंबे समय से जमीनी स्तर पर राजनीति कर रहे हैं और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को करीब से समझते हैं।

उन्होंने बताया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में पहले लगभग 3.25 लाख मतदाता थे, लेकिन विभिन्न कारणों से करीब 38 हजार मतदाता सूची से कम हो गए। इनमें कुछ लोगों का निधन हो चुका था, कुछ दूसरे स्थानों पर विस्थापित हो गए थे और कुछ अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित हो गए थे।

उन्होंने कहा, “मतदाता सूची से संबंधित पूरा कार्य व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया। इस प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दल शामिल थे। उस समय विपक्ष ने भी माना था कि काम सही ढंग से किया जा रहा है और किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगाया गया था। अब विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं।”

मंत्री ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग समय-समय पर इसे लागू करता रहा है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2003 में भी विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया था। उस समय भी वह विधायक थे और अपने कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव आयोग के सहयोग से इस प्रक्रिया में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान पुरानी मतदाता सूची को निरस्त कर नई सूची तैयार की जाती है। इस प्रक्रिया में उन लोगों के नाम हटाए जाते हैं जो अब जीवित नहीं हैं या स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर चले गए हैं। उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है, और इसमें सभी राजनीतिक दलों को सहयोग करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में राकेश सचान ने कहा कि चुनाव आयोग हर 20 से 22 वर्षों में इस तरह का पुनरीक्षण करता है। वर्ष 2003 में भी इसी प्रकार का संशोधन किया गया था और उस दौरान सभी दलों ने मिलकर मतदाता सूची को अद्यतन करने में सहयोग दिया था।

मंत्री ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी विपक्ष ने इसी तरह के मुद्दे उठाए थे, लेकिन जनता ने चुनाव में उन्हें जवाब दिया। विपक्ष जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत की जा रही है।

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी