मस्जिदों की सुरक्षा को कदम उठाएगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जामिया में छात्र संघ चुनाव की मांग का किया समर्थन
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मस्जिदों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है। बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि मस्जिदों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पहल की जाएगी, जिसमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोग भी शामिल होंगे। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की मांग का समर्थन करते हुए प्रशासन के रवैये को गलत बताया।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में मस्जिदों पर कब्जे की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब में कई मस्जिदों पर कब्जा कर लिया गया था लेकिन बाद में उन्हें मुक्त करा लिया गया।
उन्होंने कहा कि दुनिया में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। कभी मस्जिदों को गिरा दिया जाता है लेकिन मुसलमानों में उन्हें दोबारा बनाने और फिर से आबाद करने का जज्बा बना रहता है। इस तरह की घटनाओं को रोका जाना चाहिए। बोर्ड की 51 सदस्यीय निगरानी समिति की बैठक में मस्जिदों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने पर चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि इस दिशा में कुछ ठोस पहल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि दूसरे समुदायों के लोग भी शामिल होंगे। हर समुदाय का अपने पूजा-स्थलों के साथ भावनात्मक जुड़ाव होता है। धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं संवेदनशील मुद्दा हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए इलियास ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्र संघ छात्रों की बुनियादी जरूरत है और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में इसकी अहम भूमिका होती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में छात्र संघ चुनाव हो सकते हैं, तो जामिया में इसकी अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। छात्र संघ चुनाव पर पाबंदियां लगाना और चुनाव की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करना गलत है। उन्होंने प्रशासन के उस कथित रुख पर भी सवाल उठाया, जिसके अनुसार संविधान तैयार होने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जब संविधान तैयार होने की कोई निश्चित समय-सीमा स्पष्ट नहीं है, तो चुनाव की तारीख भी अनिश्चित बनी रहेगी। छात्रों की मांग है कि प्रशासन चुनाव के लिए एक निश्चित तारीख घोषित करे। इलियास ने चेतावनी दी कि छात्रसंघ चुनाव में देरी जारी रही, तो शैक्षणिक वर्ष समाप्त होने तक भी मतदान नहीं हो पाएगा।
--आईएएनएस
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