माओवादी हिंसा और नक्सली हिंसा करने वालों के अब दिन लद गए हैं : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह
नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चल रही चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रखा। लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज मैं इस मंच से देश की जनता को बताने आया हूं कि माओवादी हिंसा करने वालों और नक्सली हिंसा करने वालों के अब दिन लद गए हैं।
उन्होंने कहा कि 5 जुलाई 2011 को नंदिनी सुंदर और अन्य ने सर्वोच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया। न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाली पीठ ने नक्सलियों के खिलाफ राज्य की कार्रवाई को अवैध घोषित कर दिया। न्यायालय ने आदेश दिया कि हथियार नक्सलियों को लौटा दिए जाएं। इसके बाद, नक्सलियों ने सलवा जुडूम से जुड़े व्यक्तियों को निशाना बनाकर उनकी हत्या कर दी। बाद में, उन्हीं न्यायमूर्ति सुदर्शन रेड्डी को विपक्ष की ओर से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद नक्सल क्षेत्रों में विकास का काम शुरू हुआ। सड़क, अस्पताल, बैंक शाखाएं, एटीएम, मोबाइल नेटवर्क, डाकघर, एकलव्य आदर्श विद्यालय, आईटीआई, इंफ्रास्ट्रक्चर, इस तरह विकास के कई कार्य पीएम मोदी के नेतृत्व में हुए हैं।
उन्होंने कहा कि 2014 से इस क्षेत्र में 17,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों के निर्माण की मंजूरी दी गई है, जिनमें से 12,000 किलोमीटर का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। यह प्रगति नक्सली गतिविधियों में आई उल्लेखनीय कमी के कारण संभव हुई है, जो पहले सड़कों को नष्ट करने के लिए आईईडी लगाकर विकास में बाधा डालती थी। इन अवसंरचना परियोजनाओं में लगभग 20,000 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त, लगभग 6,000 करोड़ रुपए की लागत से लगभग 5,000 मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। दूरसंचार के विस्तार से इस क्षेत्र को देश के शेष भाग से बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदली, उसके दूसरे ही महीने मैं वहां गया था। भाजपा की सरकार ने समर्थन का पूरा भरोसा दिया, साझा रणनीति बनी और 24 अगस्त 2024 को मैंने घोषित किया था कि मार्च 2026 को नक्सलवाद हम पूरे देश से समाप्त कर देंगे। उसके बाद हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। पीएम मोदी के 11 साल के शासन में 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बने। नक्सल प्रभावित जिले जो 2014 में 126 थे, आज सिर्फ दो बचे हैं। मोस्ट इफेक्टेड जिले 2014 में 35 थे, आज शून्य हैं। ये सफलताएं हमें प्राप्त हुए हैं।
--आईएएनएस
एमएस/एबीएम
