माओवादी बनकर दहशत फैलाने वाले दो आरोपी गिरफ्तार, गढ़चिरौली पुलिस ने बैनर-पर्चे मामले का किया खुलासा
गढ़चिरौली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। जिले में माओवाद के नाम पर लोगों में भय और दहशत फैलाने की कोशिश करने वाले दो आरोपियों को गढ़चिरौली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों ने खुद को माओवादी बताकर क्षेत्र में बैनर और पर्चे लगाए थे। जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पर कार्रवाई की।
गढ़चिरौली पुलिस का कहना है कि जिले में माओवादी गतिविधियां अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं और पुलिस रिकॉर्ड में वर्तमान में कोई भी सक्रिय माओवादी मौजूद नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस ने लगातार अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की है। इसी क्रम में चलाए गए 'ऑपरेशन अंतिम प्रहार' के तहत विशेष खोज अभियान संचालित किए गए, जिसके परिणामस्वरूप जिले में माओवादी प्रभाव को खत्म करने में सफलता मिली।
पुलिस के मुताबिक, 12 जुलाई को कुछ अज्ञात लोगों ने पिपली बुर्गी थाना क्षेत्र में माओवादी संगठन से जुड़े होने का झूठा दावा करते हुए बैनर और पर्चे लगाए थे। इनका उद्देश्य आम नागरिकों में डर और भ्रम का माहौल पैदा करना था। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
जांच के दौरान सामने आया कि पिपली बुर्गी थाना क्षेत्र से करीब 5 किलोमीटर दूर जिजावंडी टोला जाने वाले मार्ग पर गांव के दिशासूचक बोर्ड के नीचे लोहे के एंगल पर लाल रंग का कपड़े का बैनर लगाया गया था। इसके अलावा पास में पत्थर के नीचे और आसपास सफेद रंग के दो पोस्टर भी मिले थे। इन पर लिखे संदेशों के जरिए लोगों में भय पैदा करने का प्रयास किया गया था।
पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के निर्देश पर विशेष जांच टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर पुलिस ने मामले में शामिल दो आरोपियों की पहचान की। गिरफ्तार आरोपियों में शिवा अनिल मिस्त्री (48), निवासी तरुणनगर, तहसील पाखांजूर, जिला कांकेर (छत्तीसगढ़) और रोहित रंजीत मलिक (25), निवासी वटेली, तहसील एटापल्ली, जिला गढ़चिरौली शामिल हैं।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आरोपियों ने माओवादी होने का झूठा माहौल बनाकर इलाके में डर फैलाने के उद्देश्य से बैनर और पर्चे लगाए थे। इस मामले में पिपली बुर्गी थाने में अपराध क्रमांक 01/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि मामले में अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों, झूठे प्रचार और भ्रामक गतिविधियों से सावधान रहें।
--आईएएनएस
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