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मानसून के लिए पूरी तरह तैयार मध्य रेलवे, जलभराव से लेकर घाट सेक्शन तक विशेष इंतजाम

मुंबई, 3 जून (आईएएनएस)। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) स्वप्निल नीला ने मानसून की तैयारियों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि इस साल भी यात्रियों को सुरक्षित और सुचारू रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।
 
मानसून के लिए पूरी तरह तैयार मध्य रेलवे, जलभराव से लेकर घाट सेक्शन तक विशेष इंतजाम

मुंबई, 3 जून (आईएएनएस)। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) स्वप्निल नीला ने मानसून की तैयारियों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि इस साल भी यात्रियों को सुरक्षित और सुचारू रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान रेलवे को मुख्य रूप से तीन तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पहली चुनौती मुंबई और उपनगरीय इलाकों में जलभराव की होती है। दूसरी चुनौती घाट सेक्शन में भूस्खलन, पत्थरों के गिरने और ट्रैक पर अवरोध पैदा होने की रहती है। वहीं, तीसरी चुनौती महाराष्ट्र के अन्य रेल खंडों में भारी बारिश के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं से जुड़ी होती है।

स्वप्निल नीला ने कहा कि पिछले साल रेलवे ने मानसून का सफलतापूर्वक सामना किया था। घाट सेक्शन में किसी तरह की बड़ी बाधा नहीं आई थी, और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी रेल संचालन सामान्य रहा। मुंबई में 26 मई को हुई भारी बारिश के दौरान करीब 272 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी। उस समय केवल चुनाभट्टी स्टेशन के पास कुछ समय के लिए परिचालन प्रभावित हुआ था, जिसके चलते हार्बर लाइन की सेवाओं में लगभग आठ से नौ घंटे तक बदलाव करना पड़ा था। इसके अलावा कुछ मामूली व्यवधान भी सामने आए थे।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष रेलवे ने पहले से ही 117 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर ली है, जहां जलभराव की आशंका रहती है। इन सभी जगहों पर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए हैं और पानी निकालने के लिए बड़ी क्षमता वाले पंप लगाए गए हैं। मुंबई मंडल ने इन स्थानों पर 210 से अधिक पंप स्थापित किए हैं। कई जगहों पर दो या उससे अधिक पंप भी लगाए गए हैं ताकि भारी बारिश के दौरान भी पानी तेजी से निकाला जा सके।

रेलवे ने सबसे अधिक संवेदनशील माने जाने वाले 18 स्थानों पर विशेष इंजीनियरिंग कार्य भी किए हैं। चुनाभट्टी स्टेशन पर ट्रैक को 70 से 75 मिलीमीटर तक ऊंचा उठाया गया है ताकि बारिश का पानी ट्रैक पर जमा न हो। इसके अलावा, कई पुलों और जल निकासी तंत्र को भी मजबूत किया गया है।

ठाणे और छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच कई महत्वपूर्ण स्थानों पर माइक्रोटनलिंग और ड्रेनेज सुधार का काम किया गया है। इससे पानी का प्रवाह बेहतर होगा और स्टेशन परिसर या ट्रैक पर जलभराव की स्थिति नहीं बनेगी। सायन, विक्रोली, कांजुरमार्ग, कुरला और तिलक नगर जैसे इलाकों में भी ट्रैक लिफ्टिंग और रियलाइनमेंट का काम पूरा किया गया है।

उन्होंने बताया कि रेलवे ने लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपए की लागत से बड़े पैमाने पर पाइपलाइन और ड्रेनेज नेटवर्क विकसित किया है। कई स्थानों पर एक मीटर व्यास की बड़ी पाइपलाइनें बिछाई गई हैं ताकि बारिश का पानी तेजी से निकल सके और ट्रेनों का संचालन प्रभावित न हो।

घाट सेक्शन की तैयारियों पर बात करते हुए स्वप्निल नीला ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से रेलवे ने इस क्षेत्र में लगातार सुरक्षा उपायों को मजबूत किया है। पहले मानसून के दौरान अक्सर पहाड़ियों से पत्थर गिरने, भूस्खलन होने और ट्रैक पर मलबा आने की घटनाएं सामने आती थीं। लेकिन अब इन जोखिमों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि रेलवे ने बड़े पैमाने पर रॉक फॉल बैरियर, बोल्डर नेटिंग और बोल्डर फेंसिंग का काम कराया है। लगभग 88 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में बोल्डर नेटिंग की गई है, जबकि 890 मीटर लंबाई में रॉक फॉल बैरियर लगाए गए हैं। इसके अलावा 514 रूट किलोमीटर क्षेत्र में बोल्डर फेंसिंग की गई है।

टनलों की सुरक्षा के लिए भी विशेष कार्य किए गए हैं। टनल पोर्टल्स को मजबूत बनाया गया है और कई स्थानों पर रिटेनिंग वॉल बनाई गई हैं ताकि बारिश के दौरान मिट्टी या पत्थर ट्रैक पर न आ सकें। कुछ जगहों पर बोल्डर कैचिंग पिट भी बनाए गए हैं, जिनमें पहाड़ियों से गिरने वाले पत्थर फंस जाएं और ट्रैक तक न पहुंच सकें।

सीपीआरओ ने कहा कि इन सभी उपायों का उद्देश्य यात्रियों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराना है। रेलवे का पूरा प्रयास है कि इस मानसून में भी ट्रेनों का संचालन सुचारू बना रहे।

माथेरान टॉय ट्रेन को लेकर भी उन्होंने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेरल-माथेरान रेलखंड पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है और यहां तीखे मोड़ तथा खड़ी ढलानें हैं। सुरक्षा कारणों से हर साल मानसून के दौरान नेरल से अमन लॉज तक ट्रेन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी जाती हैं। हालांकि अमन लॉज से माथेरान तक सीमित सेवा जारी रहती है ताकि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिलती रहे।

उन्होंने कहा कि जैसे ही भारी बारिश का दौर शुरू होगा, रेलवे इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। मानसून के दौरान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी और मौसम की स्थिति के अनुसार सेवाओं का संचालन किया जाएगा।

स्वप्निल नीला ने विश्वास जताया कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी मध्य रेलवे मानसून की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करेगी और यात्रियों को सुरक्षित, सुचारू तथा भरोसेमंद रेल सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

--आईएएनएस

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