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मणिपुर में शांति की अपील के साथ आगे आए पूर्व सैनिक और उनके परिवार

नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। मणिपुर में 150 से ज्यादा पूर्व सैनिक, उनके परिवार और वीर नारियां शांति की पहल में शामिल हुए हैं। पूर्व सैनिकों ने शांति की अपील की और लोगों से हर प्रकार की हिंसा छोड़ने को कहा है। पूर्व सैनिकों ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अपनी एक दिन की पेंशन देने का निर्णय भी लिया है। इसके साथ ही इन पूर्व सैनिकों ने शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों का साथ देना की बात कही है।
 
मणिपुर में शांति की अपील के साथ आगे आए पूर्व सैनिक और उनके परिवार

नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। मणिपुर में 150 से ज्यादा पूर्व सैनिक, उनके परिवार और वीर नारियां शांति की पहल में शामिल हुए हैं। पूर्व सैनिकों ने शांति की अपील की और लोगों से हर प्रकार की हिंसा छोड़ने को कहा है। पूर्व सैनिकों ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अपनी एक दिन की पेंशन देने का निर्णय भी लिया है। इसके साथ ही इन पूर्व सैनिकों ने शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों का साथ देना की बात कही है।

इस पूरे आयोजन का नेतृत्व सेवानिवृत्त वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल के हिमालय सिंह और ब्रिगेडियर एल. इबोटोम्बी सिंह ने किया। लेफ्टिनेंट जनरल के हिमालय सिंह ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब समय है कि मणिपुर के लोग हर तरह की हिंसा को छोड़ें, फिर चाहे वह हमले हों, आगजनी हो या भड़काऊ बातें। इन सभी हिंसक तरीकों को पूरी तरह छोड़ दें।

उन्होंने यह भी कहा कि शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों का साथ देना बेहद जरूरी है। जब मणिपुर हिंसा और तनाव के दौर से गुजर रहा है, तब इन पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों ने एक मजबूत और भावनात्मक संदेश दिया कि ‘हम सब एक हैं, और हमें शांति चाहिए’। इसके लिए इंफाल के कांगला गेट के सामने कैंडललाइट अपील आयोजित की गई। इस अपील में 150 से ज्यादा पूर्व सैनिक, उनके परिवार और वीर नारियां शामिल हुईं। खास बात यह रही कि तेज बारिश और खराब मौसम भी उनके हौसले को नहीं डिगा सका।

हर हाथ में जलती मोमबत्ती सिर्फ रोशनी नहीं, बल्कि शांति और उम्मीद का प्रतीक बन गई। पूर्व सैनिकों ने हाल की दुखद घटनाओं पर गहरी चिंता जताई। उखरुल में एक सेवानिवृत्त सैनिक की हत्या कर दी गई थी। वहीं, त्रोंग्लाओबी गांव में एक बीएसएफ जवान के परिवार पर हमला, जिसमें एक छह महीने के मासूम सहित दो बच्चों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने सभी को झकझोर दिया है। अब यहां शांति की अपील के साथ जैसे ही मोमबत्तियां जलीं, पूरा माहौल भावुक और संकल्प से भरा नजर आया। इस कार्यक्रम से पहले 25 अप्रैल को एक और सराहनीय पहल की गई थी।

रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस), लम्फेलपत में ‘ब्लड्स यूनाइट पीपल’ थीम के साथ एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। इसका संदेश था, ‘खून का रंग एक होता है, और इंसानियत सबसे ऊपर है।' इसी संवेदनशीलता को व्यक्त करते हुए पूर्व सैनिकों ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने इन पीड़ित परिवारों की मदद के लिए अपनी एक दिन की पेंशन देने का संकल्प लिया। यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एकजुटता और मानवीयता की मिसाल है।

ब्रिगेडियर एल इबोटोम्बी सिंह ने भी यहां महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों को सख्ती के साथ-साथ लोगों का भरोसा जीतने पर भी ध्यान देना चाहिए। साथ ही, उन्होंने यह भी जोर दिया कि स्थायी शांति के लिए राजनीतिक बातचीत का माहौल बनाना जरूरी है। इस कैंडललाइट कार्यक्रम के दौरान सात अहम बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भी पास किया गया। इसमें साफ कहा गया कि सभी मिलकर शांति, न्याय और बिना हिंसा के साथ रहने वाले समाज के लिए काम करेंगे।

अंत में सभी लोगों ने एक साथ शपथ ली कि वे हर उस कोशिश का समर्थन करेंगे जो मणिपुर में भाईचारा, भरोसा और शांति को मजबूत करे। उन्होंने यह भी संकल्प लिया कि राज्य की एकता और विविधता, चाहे वह जाति, धर्म, भाषा या समुदाय हो, सबका सम्मान किया जाएगा।

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी