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मंदिर हो या मस्जिद, अवैध निर्माण पर कार्रवाई जायज : आनंद दुबे

मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग से जुड़े एसआईआर विवाद, आईआईटी बॉम्बे में हुई आत्महत्या के मामले, मस्जिदों पर कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर अपनी राय दी। उन्होंने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के सामने स्पष्टीकरण देने की मांग की, वहीं आईआईटी बॉम्बे मामले में जांच पूरी होने तक इंतजार करने की अपील की।
 

मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) नेता आनंद दुबे ने चुनाव आयोग से जुड़े एसआईआर विवाद, आईआईटी बॉम्बे में हुई आत्महत्या के मामले, मस्जिदों पर कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर अपनी राय दी। उन्होंने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के सामने स्पष्टीकरण देने की मांग की, वहीं आईआईटी बॉम्बे मामले में जांच पूरी होने तक इंतजार करने की अपील की।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेदों पर आनंद दुबे ने कहा कि अभी तक विपक्ष और जनता ही इस प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगा रही थी, लेकिन अब आयोग के अंदरूनी मतभेदों की बातें सामने आ रही हैं। क्या एसआईआर किसी को फायदा या किसी को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है? चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि वास्तविक स्थिति क्या है? पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली में अधिकारियों, नेताओं, मंत्रियों, पुलिसकर्मियों के साथ-साथ आम नागरिकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के नाम भी कटने की बातें सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि एसआईआर अपने आप में सामान्य प्रक्रिया है और मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए। लेकिन, अगर किसी जीवित मतदाता को मृत दिखाकर उसे मतदान के अधिकार से वंचित किया जाता है तो यह गंभीर विषय होगा। उन्होंने इस मामले में व्यापक बहस और चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण की जरूरत बताई।

आईआईटी बॉम्बे में हुई आत्महत्या के मामले में आनंद दुबे ने कहा कि घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और सभी को इसका दुख है। क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है और फिलहाल जांच के नतीजे का इंतजार किया जाना चाहिए। घटना के वास्तविक कारण अभी पूरी तरह सामने नहीं आए हैं। पुलिस की विस्तृत जांच और आधिकारिक जानकारी सामने आने तक इंतजार करना उचित होगा।

उन्होंने मुंबई की विविध सामाजिक संरचना का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग जाति, धर्म और भाषा के लोग साथ रहते हैं। घटना को किसी जातिगत विवाद के रूप में देखने से पहले जांच के निष्कर्ष सामने आने चाहिए। उन्होंने मृत छात्र के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों के साथ भी अन्याय नहीं होने की बात कही।

मस्जिदों को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से तोड़े जाने और दिल्ली में कार्रवाई के सवाल पर आनंद दुबे ने कहा कि प्रशासन को अपना काम करने का अधिकार है। यदि कोई धार्मिक या अन्य ढांचा अवैध तरीके से बनाया गया है तो कार्रवाई कानून के अनुसार होनी चाहिए। मंदिर हो या मस्जिद, अवैध निर्माण को धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इतिहास में कई मंदिरों पर भी कार्रवाई हुई है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भी उल्लेख किया और एआईएमआईएम की राजनीति पर सवाल उठाए।

कर्नाटक में 'वंदे मातरम' को लेकर चल रहे मामले पर आनंद दुबे ने कहा कि वह पहले दिन से मानते हैं कि 'वंदे मातरम' राष्ट्रभक्ति से जुड़ा है। भारत माता और देश के प्रति सम्मान के लिए किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। अदालत के सामने मामला होने के कारण वह न्यायिक पहलू पर टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक रुख है कि 'वंदे मातरम' गाया जाना चाहिए और वह इसे गाते रहेंगे।

उत्तर प्रदेश में हो रहे एनकाउंटर को लेकर आनंद दुबे ने कहा कि 2017 से राज्य में अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो रही है। अपराध करने वालों को सजा मिलनी चाहिए और अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता। जहां संभव हो, वहां अपराधियों को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत सजा दिलाई जानी चाहिए। यदि कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाता है तो आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई को पुलिस का अधिकार माना जाना चाहिए। अपराधियों को सुधरना चाहिए, अन्यथा उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम