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मानव की वास्तविक चुनौती बन गया है तीव्र मौसम: सीजीटीएन सर्वे

बीजिंग, 7 जुलाई (आईएएनएस)। इस साल पश्चिमी यूरोप और दक्षिण एशिया को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। दक्षिण पूर्वी अफ्रीका को लगातार तेज बारिश झेलनी पड़ी। बार-बार तीव्र मौसम की घटनाओं के पीछे मानवता के लिए एक कठिन सवाल है।
 

बीजिंग, 7 जुलाई (आईएएनएस)। इस साल पश्चिमी यूरोप और दक्षिण एशिया को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा। दक्षिण पूर्वी अफ्रीका को लगातार तेज बारिश झेलनी पड़ी। बार-बार तीव्र मौसम की घटनाओं के पीछे मानवता के लिए एक कठिन सवाल है।

चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन सीजीटीएन के एक वैश्विक नेटिजन सर्वे के अनुसार 83.1 प्रतिशत उत्तरदाताओं के विचार में तीव्र मौसम मानव की एक वास्तविक चुनौती बन चुकी है। विभिन्न देशों का हाथ से हाथ मिलाकर जिम्मेदारी उठाकर सहयोग करना एकमात्र सही विकल्प है।

इस सर्वे में 83.3 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इधर कुछ साल विश्व में तीव्र मौसम पैदा होने की संख्या और मजबूती स्पष्ट रूप से बढ़ गयी है। 74.7 प्रतिशत लोगों के विचार में लगातार तीव्र मौसम की घटनाएं लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं। 82.7 प्रतिशत लोगों का विचार है कि तीव्र मौसम न सिर्फ कुछ इलाकों के लिए प्राकृतिक आपदा है, बल्कि तमाम मानव जाति पर प्रभाव डालने वाला सवाल है।

इस सर्वे में 72.6 प्रतिशत लोगों का विचार है कि कार्बन उत्सर्जन घटाना और मौसम के अनुकूल होने की क्षमता सुधारना खतरे की रोकथाम की कुंजी है। 92.3 प्रतिशत लोगों का विचार है कि वैश्विक मौसम सहयोग को न सिर्फ पूंजी के समर्थन, बल्कि मौसम तकनीक, अनुभवों और चेतावनी संसाधन के शेयर की जरूरत है।

इसके अलावा 85.9 प्रतिशत लोगों के विचार में विकसित देशों पर मौमस परिवर्तन के सवाल पर ऐतिहासिक जिम्मेदारी, कानून कर्तव्य और नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। 88.7 प्रतिशत लोगों का कहना है कि विकसित देशों को इस संदर्भ में विकासशील देशों को तकनीकी मदद देनी चाहिए।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/