मन की बात में पीएम मोदी बोले- मछुआरे केवल समुद्र के योद्धा नहीं, आत्मनिर्भर भारत की नींव
नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 132वीं कड़ी में देश के मछुआरों के योगदान को सराहा। उन्होंने बताया कि कैसे बंदरगाहों के विकास और आधुनिक तकनीक के समावेश से मछुआरों का जीवन सुगम हो रहा है और मत्स्य पालन क्षेत्र में नवाचार के नए द्वार खुल रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमारे मछुआरे भाई-बहन सिर्फ समुद्र के योद्धा नहीं हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर भारत की एक मजबूत नींव भी हैं। वे सुबह होने से पहले समुद्र की लहरों से जूझते हुए, अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। ऐसे मेहनतकश मछुआरों का जीवन आज कई तरह से आसान बनाया जा रहा है। चाहे बंदरगाहों का विकास हो या मछुआरों के लिए बीमा, ऐसी कई पहल उनके बहुत काम आ रही है।"
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हम जानते हैं कि समंदर में उनकी गतिविधियों को मौसम का रुख बहुत प्रभावित करता है। इसे देखते हुए तकनीक के जरिए भी उनकी पूरी मदद की जा रही है। मुझे बेहद खुशी है कि ऐसे प्रयासों से हमारा मत्स्य पालन क्षेत्र न केवल समृद्ध हो रहा है, बल्कि कुछ नया करने का जज्बा भी भर रहा है। आज मत्स्य पालन और समुद्री शैवाल के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं और हमारे मछुआरे भाई-बहन आत्मनिर्भर बन रहे हैं।"
पीएम मोदी ने कहा, "ओडिशा के सम्बलपुर की सुजाता भूयान जी एक गृहणी थीं, लेकिन वह कुछ नया करके अपने परिवार की और मदद करना चाहती थीं। इसलिए कुछ वर्ष पहले उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू की। शुरुआती दिन उनके लिए आसान नहीं थे। मौसम में होने वाले बदलाव, मछलियों के खाने का प्रबंध और घर की जिम्मेदारियों के साथ संतुलन बनाने जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्ष के भीतर उन्होंने अपने प्रयास को एक फलते-फूलते उद्योग में बदल दिया। आज उनकी सफलता समुदाय की महिलाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "इसी तरह लक्षद्वीप में मिनीकॉय के हाव्वा गुलजार जी की कहानी हमारी माताओं-बहनों की अद्भुत संकल्प-शक्ति को सामने लाती है। दरअसल वे एक फिश प्रोसेसिंग यूनिट चलाती थीं। लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास एक अच्छा कोल्ड स्टोरेज हो तो वे और बेहतर कर सकती हैं, इसलिए, उन्होंने कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने का फैसला किया। आज यही उनकी ताकत बन चुका है। अब वे बेहतर प्लानिंग के साथ कारोबार कर पा रही हैं।"
पीएम मोदी ने कहा, "देश में आज हर तरफ ऐसे प्रयास हो रहे हैं, जो प्रेरित करने वाले हैं। बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार ने पारंपरिक खेती से अलग रास्ता चुना। इसके लिए उन्होंने एक तालाब खेत बनाया। इस कारोबार के लिए उन्हें ट्रेनिंग भी मिली। अब अपने तालाब से मछलियों की बिक्री कर अच्छी कमाई कर रहे हैं। वहीं समुद्री शैवाल की मांग को देखते हुए कई लोगों ने समुद्री शैवाल की खेती को भी अपनाया है। इसका उन्हें बड़ा लाभ भी हो रहा है। मैं एक बार फिर मत्स्य पालन क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की सराहना करता हूं। हमारी अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए उनका प्रयास बेहद प्रशंसनीय है।"
--आईएएनएस
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