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ममता की धार्मिक राजनीति उल्टी पड़ी, इंडिया ब्लॉक सिर्फ कागज पर: किरणमय नंदा

कोलकाता, 15 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी पार्टी को चुनावों में मिली हार के लिए ममता सरकार के कामकाज के रिकॉर्ड और धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया।
 
ममता की धार्मिक राजनीति उल्टी पड़ी, इंडिया ब्लॉक सिर्फ कागज पर: किरणमय नंदा

कोलकाता, 15 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी पार्टी को चुनावों में मिली हार के लिए ममता सरकार के कामकाज के रिकॉर्ड और धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया।

विपक्ष की राजनीति और इंडिया ब्लॉक की स्थिति पर आईएएनएस से ​​बात करते हुए नंदा ने कहा कि विपक्षी गठबंधन ज्‍यादातर कागजों पर ही है और जमीनी स्तर पर इसमें कोई ठोस तालमेल नहीं है, क्योंकि कई राज्यों में गठबंधन में शामिल पार्टियां ही एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।

किरणमय नंदा ने सवाल किया, "इंडिया ब्लॉक असल में कागज पर बना एक राजनीतिक समझौता है। अगर सहयोगी होने का दावा करने वाली पार्टियां ही चुनावों में एक-दूसरे से लड़ रही हैं तो असल में गठबंधन कहां है?"

विपक्षी समूह की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के बीच कोई गठबंधन नहीं था।

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा, "क्या बंगाल में कोई गठबंधन था? नहीं। क्या केरल में कोई गठबंधन था? नहीं। असल में राज्य स्तर पर इनमें से कई पार्टियों के बीच कोई वास्तविक गठबंधन नहीं है।"

पिछली तृणमूल सरकार पर निशाना साधते हुए नंदा ने दावा किया कि प्रशासन से जनता की नाराजगी भाजपा को मिली चुनावी बढ़त में साफ दिखी।

उन्होंने कहा, "पिछली सरकार के 15 साल के कार्यकाल में अच्छा नहीं, बल्कि खराब कामकाज देखने को मिला। भाजपा 208 सीटें जीतना ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से का नतीजा था।"

नंदा ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में धर्म-आधारित राजनीति शुरू की थी। एक ऐसी रणनीति जो आखिरकार उन्हीं पर उल्टी पड़ गई।

उन्होंने ​​कहा, "बंगाल में पारंपरिक रूप से धर्म पर आधारित राजनीति नहीं होती थी। ममता बनर्जी ही थीं जिन्होंने राज्य में धर्म की राजनीति शुरू की और आखिरकार यह उन्हीं पर भारी पड़ी।"

इस अनुभवी समाजवादी नेता ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में जाति की राजनीति कोई निर्णायक भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा, "बंगाल में जाति की राजनीति नहीं होती। यहां वोटिंग का पैटर्न ज्यादातर लोगों के मूड से तय होता है। इस मामले में बंगाल ऐतिहासिक रूप से कई अन्य राज्यों से अलग रहा है।"

राजनीतिक नेताओं के पार्टी बदलने के बढ़ते चलन पर टिप्पणी करते हुए नंदा ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदेह बताया। भले ही मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत इसकी इजाजत हो। उन्होंने कहा, "बार-बार पार्टी बदलना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है, हालांकि दलबदल विरोधी कानून और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के तहत इस तरह की गतिविधियां कानूनी रूप से मान्य हैं।"

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी