ममता बनर्जी सत्ता में आई तो सभी हिंदुओं को बंगाल छोड़ना पड़ेगा : मिथुन चक्रवर्ती
कोलकाता, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है और चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। इसी बीच अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आईएएनएस से एक्सक्लूसिव बातचीत में एसआईआर, आगामी चुनाव, और ममता बनर्जी द्वारा लगाए गए आरोपों पर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि इस बार भाजपा की जीत तय है।
सवाल: आपने 2021 में बंगाल में चुनाव प्रचार करना शुरू किया। बीते पांच साल में भाजपा में और बतौर भाजपा नेता क्या बदलाव और ग्रोथ नजर आए?
जवाब: मैं ग्रोथ को लेकर पार्टी के बारे में बात कर सकता हूं। पहले पार्टी संगठित नहीं थी, लेकिन अब मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि आज पार्टी संगठित है, केवल 5-10 फीसदी छोड़ दीजिए, क्योंकि हर जगह स्वार्थी लोग होते हैं, कुछ यहां भी हैं। स्वार्थी लोगों को पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है, पार्टी चाहे हारे या जीते, कोई फर्क नहीं पड़ता है। दूसरा मिथुन चक्रवर्ती में बदलाव की बात करें तो मैंने पार्टी के लिए पहले से ज्यादा समय निकाला है। आज मैं छोटे-छोटे से गांव में जाकर लोगों से मिल रहा हूं, प्रचार कर रहा हूं। यही मेरा ग्रोथ है।
सवाल: आपने पहले से ही प्रचार करना शुरू कर दिया था। आप लोगों के बीच जा रहे हैं, उनसे मिल रहे हैं, तो ऐसे में लोगों का रवैया भाजपा के लिए कैसा लगा?
जवाब: पहले पार्टी संगठित नहीं थी तो लोग असमंजस में रहते थे। लेकिन, अब पार्टी संगठित हो चुकी है और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि अब लोगों की सोच पार्टी के लिए बदली है, खासकर महाकुंभ के बाद। महाकुंभ मेले के बाद सनातनी जाग उठा है। इसलिए मैं जहां जाता हूं, सबसे कहता हूं कि मिलकर टीएमसी के खिलाफ वोट कीजिए क्योंकि अगर यह दोबारा सत्ता में आई तो जनता के साथ हमें भी भगा दिया जाएगा और फिर कहां जाना है, पता नहीं, क्योंकि सबका देश है लेकिन विश्व में हिंदुओं का सिर्फ यही देश है। अगर ऐसा नहीं चाहते हैं तो भाजपा को वोट करें।
सवाल: अगर तृणमूल कांग्रेस वापस सत्ता में आती है तो क्या मिथुन चक्रवर्ती जैसे बड़े लोगों को भी बंगाल छोड़कर जाना होगा?
जवाब: बिल्कुल, और सिर्फ मैं नहीं, मुझसे भी बड़े कई लोग हैं, जिन्हें बंगाल छोड़ने पर मजबूर किया जाएगा और सबसे बड़ा सवाल है कि जाएंगे कहां? मैं तो चलो मुंबई चला जाऊंगा। लेकिन, बाकी लोग कहां जाएंगे। उन्होंने कहा भी था कि अगर वो नहीं होतीं तो कब का बंगाली हिंदुओं को भगा देते। अब खुद लोग उनके मुंह से ऐसी बातें सुन रहे हैं तो क्या कहें?
सवाल: भाजपा पर भी आरोप लगते हैं कि वो एंटी-माइनॉरिटी की राजनीति करती है, इसको लेकर क्या कहेंगे?
जवाब: मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि भाजपा मुसलमानों के खिलाफ नहीं है क्योंकि मैंने पार्टी को अंदर से जाना है, लेकिन पार्टी उन मुस्लिमों के खिलाफ है, जो देश में रहकर देश को क्षति पहुंचाना चाहते हैं। हमारी पार्टी राष्ट्रवादी पार्टी है।
सवाल: बंगाल में एसआईआर एक बड़ा मुद्दा है, कुछ लोग इसे सपोर्ट करते हैं तो कुछ लोग नहीं, लेकिन इस मुद्दे पर आपका क्या कहना है?
जवाब: कौन-कौन 'न' कह रहा है? मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आखिर इसका विरोध कौन कर रहा है? कौन-कौन सी हस्तियां इसके खिलाफ हैं? उनसे पूछिए कि 'न' कहने का कारण क्या है। यह क्यों नहीं होना चाहिए? हम आखिरी चुनाव तो जीत चुके हैं, 44,300 वोटों से जीते हैं और 44 हजार वोट कैंसिल हो गए, तो जीता कौन, हम न? आप क्या चाहते हैं कि हम बेईमानी करके बाकी की तरह सरकार बनाएं या फिर संविधान के मुताबिक सत्ता में आएं। कुछ उन लोगों के लिए आवाज उठाई जा रही है, जो हमारे देश के ही नहीं हैं। अगर हमारे देश के नागरिकों के साथ गलत होगा तो मैं भी विरोध करुंगा, लेकिन जो हमारे हैं नहीं, उनके लिए किन्हें तकलीफ हो रही है? पूरे राज्य में ममता बनर्जी ही विरोध कर रही हैं, क्योंकि उन्हीं वोटो से जीतकर आना है, और किसी दूसरे का नाम बताइए।
सवाल: विरोध का कारण ये है कि वोटर्स का नाम भी कट रहा है और दूसरा जिनका नाम कट रहा है वो तृणमूल कांग्रेस के लोग हैं?
जवाब: वे तृणमूल के समर्थक हैं, इसके लिए क्या कार्रवाई की जा सकती है? कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। संविधान किसी को यह अधिकार नहीं देता। यह महज उनका दुष्प्रचार है। उनके पास बोलने के लिए कुछ है नहीं। वे यह बोल नहीं सकते कि चोरी से जीते हैं। जब आपका वोट ही गलत है तो क्या ही कहना, यह हम नहीं, बल्कि संख्या बोल रही है। यह संविधान के अनुरूप हुआ है और इसमें भाजपा के वोटर्स भी हो सकते हैं, लेकिन हमने विरोध नहीं किया है, लेकिन अगर कोई हमारे देश का है और उसका नाम काट दिया गया है तो मैं उसका समर्थन करूंगा। एसआईआर की वजह से ही तो पता चला कि कितने मरे हुए लोग वोट देने आ रहे हैं। कहां से आ रहे हैं, यह लोग? उनके लिए आलू-पूरी की दावत रखते थे, वो ऊपर से आते थे और वोट देकर निकल जाते थे।
सवाल: एसआईआर को लेकर सबसे बड़ा बेनिफिशरी कौन रहेगा?
जवाब: बेनिफिशरी का पता नहीं, लेकिन हम आखिर तक लड़ते रहेंगे। जो भी फर्जी वोट वोट-बैंक में डाले गए हैं, वो सभी कुछ माइनस हो जाएगा और अगर इलेक्शन कमीशन और सख्त हो जाए तो हम आराम से लड़ सकते हैं।
सवाल: तृणमूल कांग्रेस का आरोप रहता है कि जब भी बंगाल के लोग बाहर लड़ने के लिए जाते हैं तो खासकर भाजपा शासित देशों में उनका शोषण किया जाता है। आप खुद बंगाल से हैं और आज भी फिल्मों में काम कर रहे हैं। ऐसे में कभी आपको लगा कि ऐसा होता है बाहर के राज्यों में?
जवाब: मैं मुंबई से लेकर ऊटी तक रहा हूं और मुझे कभी महसूस नहीं हुआ। ऐसा कुछ नहीं है क्योंकि ये बेकार की बातें लोगों के दिमाग में भरी जाती हैं क्योंकि तृणमूल कांग्रेस के पास कोई पॉलिसी नहीं है। उसको राजनीति करनी नहीं आती है और यही कारण है कि मैंने भी बोलना कम कर दिया है।
सवाल: तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी आरोप लगाती हैं कि अगर भाजपा यहां आ गई, तो यहां के लोग क्या खाएंगे, वह भी भाजपा तय करेगी?
जवाब: भाजपा 21 राज्यों में सरकार चला रही है, क्या वे वहां के लोगों के खान-पान का फैसला कर रहे हैं? लोग अपनी मर्जी से खा रहे हैं, है न? वे मछली, चिकन, सबकुछ खा रहे हैं। हां, कुछ जगहों पर धार्मिक कारणों से कुछ खास तरह के मांस पर प्रतिबंध लगाया गया है, खासकर उन क्षेत्रों में जो हमारे लिए बहुत संवेदनशील हैं, लेकिन हम भी उनके कुछ फैसलों की इज्जत करते हैं, लेकिन कुछ लोगों को इसी को लेकर राजनीति करनी है।
सवाल: जब कोई राजनीतिक पार्टी खाने के लेकर पाबंदी लगाती है तो लोगों के बीच विभाजन की भावना पैदा होती है। इस पर क्या कहेंगे?
जवाब: यह विभाजन आज से शुरू नहीं हुआ है। उनके सत्ता में आने के लगभग एक से डेढ़ साल बाद से यह शुरू हुआ है, यानी, दो समुदायों को बांटने के लिए। क्या आपने बंगाल में इससे पहले कभी इस तरह का हिंदू-मुस्लिम विभाजन सुना है? तब से, यह लोगों को बांटने और अपने पक्ष में वोट हासिल करने के बारे में है। हमें पता है कि बंगाल से मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करेंगे, लेकिन बाकी जगह के लोगों ने वोट किया, तभी तो हम सत्ता में आए हैं। बिहार में भी मुसलमान भाइयों ने वोट किया, तभी तो सरकार बनी, लेकिन इस बार बंगाल में भी वो लोग वोट करेंगे। क्या आपने कभी किसी पार्टी को 'तृणमूल कांग्रेस को हटाओ' कहते सुना है? नहीं, है न? वे 'भारतीय जनता पार्टी को हटाओ' कहते हैं, उसे 'फासीवादी पार्टी' कहते हैं, लेकिन आप उन्हें 'तृणमूल को हटाओ' कहते नहीं सुनेंगे। इसलिए लोगों को समझ आ रहा है कि ममता क्या करना चाह रही हैं।"
सवाल: बंगाल में मस्जिद का निर्माण हो रहा है, जिसका नाम बाबरी मस्जिद रखा जाएगा। क्या आपको लगता है कि यह जानबूझकर विवाद हो रहा है?
जवाब: अभी मस्जिद बनी नहीं है, तो मैं कुछ नहीं बोलूंगा। बाकी राजनीति की बात करें तो यह राजनीति करने का तरीका है क्योंकि उनके पास कुछ बचा नहीं करने को।
सवाल: आप दो साल से लगातार भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं, लेकिन चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
जवाब: ये सब मेरी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं नहीं हैं। भगवान ने मुझे जो कुछ भी दिया है, मैं उसे पूरी तरह से संभाल नहीं पा रहा हूं। दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण और दादासाहेब फाल्के पुरस्कार, ये सर्वोच्च सम्मान, एक गरीब लड़के को मिले हैं, जो फुटपाथ से आया है। मैं अब भी इन सब बातों को समझ नहीं पा रहा हूं। तो, मैं और अधिक क्यों चाहूं? अगर मैं चुनाव लड़ता हूं तो एक जगह सीमित हो जाऊंगा, और मैं सीमित नहीं होना चाहता हूं।
सवाल: अगर पार्टी बंगाल में जीत जाती है और आपको सीएम का पद देती है, तब आपका फैसला क्या होगा?
जवाब: पार्टी का हर फैसला माना जाएगा और अगर ऐसा होता है तो मैं हां कहूंगा।
सवाल: 'धुरंधर' जैसी फिल्म सारे रिकॉर्ड तोड़ रही है, लेकिन इस फिल्म को भी लोग प्रोपेगेंडा बता रहे हैं। इस पर आपकी क्या राय है?
जवाब: आपने 'बंगाल फाइल्स' को यहां रिलीज नहीं होने दिया। इससे बड़ा मुद्दा आप और क्या उठाएंगे? फिर भी आप 'धुरंधर' को प्रोपेगेंडा कह रहे हैं। तो, फिर आपने 'धुरंधर' को भी क्यों नहीं रोका? वह रिलीज हुई और अब आप उसे प्रोपेगेंडा कह रहे हैं। लेकिन, आपने 'बंगाल फाइल्स' की एक रील तक नहीं देखी। शुरू से ही आपने इसका विरोध किया और फिल्म को बंगाल में रिलीज नहीं होने दिया। इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है? दादीगिरी है उनकी, लेकिन 'धुरंधर' ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं क्योंकि हर संप्रदाय के लोगों ने फिल्म देखी है।
--आईएएनएस
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