मल्लिकार्जुन खड़गे के विवादित बयान का संजय राउत ने किया बचाव, कहा- असल मुद्दों पर आंदोलन करे भाजपा
मुंबई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विरोध-प्रदर्शन को लेकर पलटवार किया। उन्होंने विवादित शब्द को ग्रामीण महाराष्ट्र में आम बोलचाल का हिस्सा बताया। संजय राउत ने कहा कि इसमें भावुक होने की जरूरत नहीं है। भाजपा पहले चीन के अरुणाचल में घुसपैठ करने, लद्दाख और मणिपुर जैसे असल मुद्दों पर आंदोलन करे।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा, "मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में एक बात कही है। अब भाजपा के लोगों को कोई नया मुद्दा मिल गया है। वे पूरे देश में आंदोलन कर रहे हैं। अगर हम लोग दिल्ली या मुंबई में आंदोलन करते हैं, तो हमें परमिशन लेनी पड़ती है, हमें अरेस्ट किया जाता है और बाद में हमसे बॉन्ड भरवाया जाता है। नया कानून लाया गया और बॉन्ड लिया जाता है। अब बताइए, भाजपा के कितने लोगों से सरकार ने बॉन्ड लिया है?"
उन्होंने कहा कि सरकार चाहे दिल्ली की हो या पूरे देश की, आंदोलन करना सभी का अधिकार है। हम मानते हैं कि मल्लिकार्जुन खड़गे बहुत अनुभवी नेता हैं। उनकी पूरी जिंदगी, 50-60 साल से भी ज्यादा समय राजनीति में बीती है। लेकिन हमारे यहां एक कहावत है। हम इसे गलत तरीके से नहीं लेते।
संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में लोग कई शब्दों का इस्तेमाल आम बोलचाल में करते हैं। प्यार से कहते हैं। साहित्य में भी ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं। अगर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कोई बात कही है तो उसमें भावुक होने की जरूरत नहीं है। आपने भी कई बार हमसे जुड़ी टिप्पणियां की हैं। इसलिए इस बात को छोड़ देना चाहिए। पूरे देश में केवल एक शब्द पर आंदोलन करना उचित नहीं है।
संजय राउत ने कहा कि चीन अरुणाचल प्रदेश में घुस आया है, उस पर आंदोलन कीजिए। कहा जा रहा है कि चीनी सैनिक कई किलोमीटर अंदर तक आ गए हैं, उस पर बात कीजिए। लद्दाख में क्या हुआ, मणिपुर में क्या चल रहा है, उस पर कोई आंदोलन नहीं करेगा? भाजपा के लोग इन मुद्दों पर नैरेटिव नहीं बनाएंगे, लेकिन मल्लिकार्जुन खड़गे की बातों पर आंदोलन करेंगे। यह सब अनावश्यक है, इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि फ्रांस में भी लोग सड़कों पर उतरकर अपना असंतोष जता रहे हैं। भारत में भी लोग उतर रहे हैं। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में जो रैली है, उसका दृश्य अपनी आंखों में बसा कर रखिए। आप देखेंगे कि पूरे देश से लोग आएंगे। लेकिन मीडिया पर सेंसरशिप है। सरकार की आलोचना से जुड़ी खबरें आपको दिखाने नहीं दी जाती हैं। आज भारत में यही चल रहा है। लोगों को पकड़कर जेल में डाला जा रहा है। देश का व्यापारी वर्ग परेशान है। नोटबंदी हो, जीएसटी हो, ईडी हो या आयकर विभाग की कार्रवाई, व्यापारी खुद कह रहे हैं कि वे परेशान हैं। वे आंदोलन की बात कर रहे हैं। अभी त्योहारों का माहौल है, लेकिन त्योहारों से बड़ा देश है। इसलिए 1 नवंबर को आंदोलन होगा। राहुल गांधी ने तय किया है कि आंदोलन एक नवंबर को होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि व्यापारी इसका समर्थन नहीं कर रहे, लेकिन असली व्यापारी कौन हैं, यह जनता जानती है। शेयर बाजार में किसका नुकसान होगा, यह भी सब देखेंगे। इसलिए यह कहना कि आंदोलन नहीं होना चाहिए, उचित नहीं है। जहां तक न्यायपालिका की बात है, ऐसी टिप्पणियां नहीं लिखी जानी चाहिए थीं कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सरकार के नियंत्रण में थे या सरकार की बात अधिक सुनते थे। यह गलत है, यह हम भी मानते हैं। लेकिन आज भी जनता की आखिरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट ही है। अगर सुप्रीम कोर्ट भी सरकार के सामने झुक जाए या सरकार की हर बात मानने लगे, तो लोगों को लगेगा कि न्याय कैसे मिलेगा।
--आईएएनएस
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