मालदा में हुई हिंसा दुखद, चुनाव आयोग ले संज्ञान: आनंद दुबे
मुंबई, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के नेता आनंद दुबे ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में हिंसा, भाजपा नेता नवनीत राणा के बयान और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में हुए हिंसा पर चुनाव आयोग को संज्ञान लेना चाहिए।
उन्होंने पश्चिम बंगाल के मालदा में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों से मारपीट और हिंसा की घटनाओं पर चिंता जताई। आनंद दुबे ने कहा कि राज्य में चुनाव के दौरान हिंसा की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों को जिम्मेदार ठहराया।
शिवसेना (यूबीटी) के नेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि जब चुनाव के समय लूटपाट, अपहरण और अधिकारियों को बंधक बनाए जाने जैसी घटनाएं हों, तो जनता में गलत संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। चुनाव आयोग को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और राज्य सरकार को कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य के सहयोग से ही किसी प्रदेश का सुचारू संचालन संभव है। आनंद दुबे ने उम्मीद जताई कि 4 मई को बनने वाली नई सरकार के साथ पश्चिम बंगाल में हिंसा का अंत होगा।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर आनंद दुबे ने स्पष्ट रूप से समर्थन जताते हुए कहा कि इसे देश में पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए और यह कोई बहस या विवाद का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
वहीं, भाजपा नेता नवनीत राणा के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि बुर्का पहनने वाली कोई भी महिला महापौर या मुख्यमंत्री नहीं बन सकती, दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों को ज्यादा महत्व देने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि नवनीत राणा को धार्मिक ग्रंथों का कितना ज्ञान है, यह भी सवाल है। दुबे ने कहा कि देश में असली मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी और आम लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के हैं, जिन पर चर्चा होनी चाहिए, न कि इस प्रकार के बयानबाजी पर।
--आईएएनएस
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