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मैं 65 वर्षों से लगातार लिख रहा हूं, यकीन नहीं था पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा : रतिलाल बोरिसागर

अहमदाबाद, 20 मई (आईएएनएस)। पद्म पुरस्कार से सम्मानित गुजराती साहित्यकार और शिक्षाविद् रतिलाल बोरिसागर ने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि लिखने और पढ़ाने के उनके साधारण कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।
 
मैं 65 वर्षों से लगातार लिख रहा हूं, यकीन नहीं था पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा : रतिलाल बोरिसागर

अहमदाबाद, 20 मई (आईएएनएस)। पद्म पुरस्कार से सम्मानित गुजराती साहित्यकार और शिक्षाविद् रतिलाल बोरिसागर ने कहा कि उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि लिखने और पढ़ाने के उनके साधारण कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

अहमदाबाद में आईएएनएस से बातचीत में बोरिसागर ने कहा कि मैं 65 वर्षों से लगातार लिख रहा हूं। हाईस्कूल के छात्र काल से ही लेखन शुरू किया था और आज भी यह सिलसिला जारी है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने प्राथमिक, माध्यमिक विद्यालय और कॉलेज में कुल 16 वर्ष पढ़ाई की तथा गुजरात राज्य स्कूल बोर्ड में 24 वर्ष तक गुजराती साहित्य की पाठ्यपुस्तकों पर कार्य किया।

उन्होंने कहा कि मुझे जो काम करना है, ईश्वर ने मुझे जो उपहार दिया है, उसे मैं सर्वोत्तम तरीके से वापस लौटाना चाहता हूं। मैंने कभी पुरस्कार या प्रतिफल की अपेक्षा नहीं की। मां जैसा भाव है, मां कुछ भी दे तो खुशी, न दे तो भी कोई शिकायत नहीं। जो सहज रूप से मिला है, उसका आनंद भी है। राष्ट्रीय स्तर पर जो सम्मान मिलता है तो खुशी होती है।

उन्होंने कहा कि मुझे कई पुरस्कार और सम्मान मिले हैं, लेकिन मैं जो कुछ स्वाभाविक रूप से मिला, उसी में खुश रहा। अब मेरे काम को राष्ट्रीय स्तर पर पद्म पुरस्कार से मान्यता मिली है, यह अत्यंत हर्ष का विषय है।

बोरिसागर ने हाल के वर्षों में पद्म पुरस्कार चयन प्रक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है। पहले बड़े नामों को पुरस्कार मिलता था, लेकिन अब भारत सरकार उन अनजान लोगों को भी खोजकर सम्मानित कर रही है, जो अपने क्षेत्र में तो जाने जाते हैं, लेकिन पूरे देश में उनकी पहचान नहीं होती। उनकी सेवा-भावना और लगन को महत्व दिया जा रहा है। इसके लिए मैं भारत सरकार को बधाई और आभार व्यक्त करता हूं। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे पद्म पुरस्कार मिलेगा। हालांकि, मुझे साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार मिले हैं, पहली बार मुझे इतना बड़ा पुरस्कार मिला है।

पुरस्कार समारोह के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि वे 24 मई को दिल्ली रवाना होंगे और 25 मई को शाम 5 बजे राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार वितरण समारोह में शामिल होंगे।

65 वर्षों से साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रहे रतिलाल बोरिसागर को इस वर्ष ‘पद्म पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है। उन्होंने पुरस्कार को अपनी सेवा और समर्पण का स्वाभाविक परिणाम बताते हुए भारत सरकार की सराहना की।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम