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महिलाओं का हक के लिए आवाज उठाना जरूरी, पुरुषों को सीखना होगा सम्मान करना : श्रीश्री रविशंकर

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रवि शंकर ने महिलाओं के अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि महिलाओं का अपने हक के लिए आवाज उठाना समाज में एक बहुत जरूरी और सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
 

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रवि शंकर ने महिलाओं के अधिकारों और समाज में उनकी भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि महिलाओं का अपने हक के लिए आवाज उठाना समाज में एक बहुत जरूरी और सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

श्रीश्री रविशंकर ने अपने पोस्ट में पुरुषों से महिलाओं के प्रति अपने नजरिए में बदलाव लाने की अपील की है। उन्होंने कहा, "पुरुषों को महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, उनके प्रति ज्यादा संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें सिर्फ एक 'वस्तु' की तरह नहीं देखना चाहिए।"

आध्यात्मिक गुरु ने इस बात पर जोर दिया कि सम्मान और संवेदनशीलता की यह भावना बचपन से ही विकसित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संस्कार किशोरावस्था से ही मन में बिठाया जाना चाहिए ताकि बड़ा होकर युवा एक संतुलित और सम्मानजनक सोच के साथ समाज में आगे बढ़ सके।

उन्होंने कहा कि आज के युवा पुरुषों को अपनी भावनाओं को सही तरीके से संभालना सीखना होगा। उन्होंने लिखा, "युवा पुरुषों को काम-वासना, गुस्से और दूसरी तीव्र भावनाओं को सही और स्वस्थ तरीके से संभालने और उनकी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने का तरीका भी सीखना चाहिए।"

उन्होंने इसके लिए कुछ व्यावहारिक उपाय भी सुझाए। श्री श्री रवि शंकर के अनुसार, संगीत, नृत्य, शारीरिक व्यायाम, योग और ध्यान जैसे अभ्यास युवाओं को अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने में काफी मदद कर सकते हैं। ये गतिविधियां न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रखती हैं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक होती हैं।

उन्होंने विशेष रूप से प्राणायाम के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहतर संतुलन, संवेदनशीलता, समझदारी और सहानुभूति विकसित करने में प्राणायाम बहुत असरदार हो सकता है। नियमित रूप से प्राणायाम करने से मन शांत होता है और व्यक्ति दूसरों की भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ पाता है।

गुरुदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में महिला सुरक्षा को लेकर लगातार बहस चल रही है। हाल ही में दिल्ली, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में महिलाओं से छेड़छाड़, मारपीट और दुष्कर्म की घटनाओं ने सब को स्तब्ध कर दिया था।

--आईएएनएस

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