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महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की नहीं, हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' को संबोधित करते हुए कहा कि देश में महिलाओं के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। लेकिन इसके साथ ही समाज की जिम्मेदारी है कि वो बेटियों को अवसर और आजादी दे।
 
महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की नहीं, हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' को संबोधित करते हुए कहा कि देश में महिलाओं के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। महिलाओं के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। लेकिन इसके साथ ही समाज की जिम्मेदारी है कि वो बेटियों को अवसर और आजादी दे।

सीएम रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि वह खुद हैरान थीं, जब प्रधानमंत्री ने लाल किले से खुले में शौच बंद करने और शौचालय बनाने की बात कही। इससे पहले समाज और राजनीति में किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने देश की बहनों के लिए लाखों शौचालय बनाए और उनके जीवन को आसान किया। इससे पहले महिलाओं को खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ता था।

सीएम ने कहा कि पहले महिलाओं को घर में अंगीठी पर लकड़ी जलाने जैसी तकलीफों से गुजरना पड़ता था। प्रधानमंत्री मोदी की पहल से महिलाओं को गैस और सिलेंडर दिए गए ताकि उनके जीवन को आरामदायक बनाया जा सके। इसी तरह कई योजनाओं से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक अधिकार मिले। उन्होंने कहा, "चाहे बैंक अकाउंट खोलना हो, मुद्रा लोन देना हो, महिलाओं के नाम पर घर देना हो, राजनीति में 33 प्रतिशत आरक्षण देना हो या मुझ जैसी बेटियों को मौके देना हो, सरकार, देश और प्रधानमंत्री मोदी ने हम बहनों के लिए नए रास्ते खोले हैं।"

रेखा गुप्ता ने दिल्ली सरकार की महिलाओं के लिए चल रही योजनाओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हम 'लाडली योजना' को खत्म कर 'लखपति बिटिया योजना' लेकर आए, जिसके जरिए दिल्ली की बेटियों को शिक्षा पूरी करने और आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया जा रहा है। पहले योजना में बस दसवीं तक को कवर किया जाता था, लेकिन अब ग्रेजुएशन तक पढ़ाई पूरी करने पर उनके खाते में जन्म से लेकर हर पड़ाव पर पैसा जमा किया जाता है। इस योजना से लगभग सवा लाख रुपये तक एक बेटी को मिलते हैं, जिससे वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके और अपना भविष्य बना सके।

उन्होंने संगठन सेविका समिति का भी जिक्र किया, जो समाज सेवा और महिलाओं की मदद के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि ऐसे संगठनों का समर्थन करना और उनके काम को सराहना हर किसी की जिम्मेदारी है।

सीएम ने महिलाओं और माता-पिता से कहा कि अपनी बेटियों को हर अवसर और आजादी दें। जो मौका आपको नहीं मिला, वह अपनी बेटी को जरूर दें। उन्हें अपने निर्णय लेने की आजादी दें, उन्हें आगे बढ़ने के मौके दें और खुला आसमान दें। जब हर मां अपनी बेटी के लिए रास्ता बनाएगी, तो समाज अपने आप ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सशक्तीकरण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी है। संगठन, समाज और परिवार मिलकर महिलाओं को अवसर दें तो कोई महिला अपनी सोच और क्षमता के अनुसार किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस