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'महिला आरक्षण बिल' के विरोधियों को नारी शक्ति के आक्रोश का करना होगा सामना : बांसुरी स्वराज

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज ने गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026' का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सम्मान हमारी संस्कृति है और नारियों का सशक्तीकरण हमारा कर्तव्य है।
 
'महिला आरक्षण बिल' के विरोधियों को नारी शक्ति के आक्रोश का करना होगा सामना : बांसुरी स्वराज

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज ने गुरुवार को लोकसभा में पेश किए गए 'संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026' का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सम्मान हमारी संस्कृति है और नारियों का सशक्तीकरण हमारा कर्तव्य है।

उन्होंने कहा कि भारत की बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। 2024 के चुनाव के दौरान महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक थी। विपक्ष और इस बिल का विरोध करने वालों से मैं पूछना चाहती हूं कि क्या आप महिलाओं की भूमिका सिर्फ मतदाता तक ही सीमित रखना चाहते हैं? इस सदन में महिलाओं का प्रतिनिधित्व महज 13.6 प्रतिशत है। हम विधानसभा में जाएं तो वहां महिलाओं का प्रतिनिधित्व दस प्रतिशत से भी कम है। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 27.6 प्रतिशत है। मैं प्रधानमंत्री मोदी और इस बिल का समर्थन करने वालों को धन्यवाद देती हूं, जिन्होंने 27 साल बाद इस बिल को 2023 में पारित करवाया।

बांसुरी स्वराज ने सवाल उठाया कि जिन लोगों ने इस बिल को सर्वसम्मति से पास कराया था, वे इसे 2029 में लागू करने के लिए अपना समर्थन क्यों नहीं दे रहे हैं? उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि यह पावर ग्रैब का मुद्दा नहीं है, बल्कि पावर बैलेंस का मुद्दा है। यह हक की चोरी का नहीं, हक के हिसाब का मामला है। इस सदन को नारी शक्ति के हक का हिसाब देना होगा।

उन्होंने अखिलेश यादव के ‘जल्दबाजी’ के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि 40 साल की देरी हो चुकी है, तो आप जल्दबाजी का आरोप किस मुंह से लगा रहे हैं? बात चुनाव की है, तो हमारे यहां तो हमेशा चुनाव होते रहते हैं। चुनाव मातृ शक्ति का हक मारने के लिए कोई बहाना नहीं बन सकता।

बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि परिसीमन को लेकर एक भ्रम पैदा कर दिया गया है। परिसीमन भाजपा का मुद्दा नहीं है, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करना मंजिल है और परिसीमन केवल एक रास्ता है। राह और मंजिल में भ्रम पैदा मत कीजिए।

उन्होंने कहा कि फिलहाल संसद में 1971 की जनगणना के आधार पर 543 सीटें हैं। तब भारत की जनसंख्या बहुत कम थी, जबकि आज यह तीन गुना हो चुकी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए परिसीमन होना और सीटों का बढ़ाया जाना जरूरी है।

बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि तमिलनाडु में चुनाव के चलते वहां के नेता दक्षिण और उत्तर के नाम पर देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका यह प्रयास असफल होगा। जिस संगत में ये लोग बैठे हैं, वहां सिर्फ हार का चिट्ठा लिखा जाता है। जो लोग इस संशोधन का विरोध कर रहे हैं, उन्हें नारी शक्ति के आक्रोश का सामना करना होगा।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम