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महाराष्ट्र: विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए बनाते थे फर्जी स्कोरकार्ड और सर्टिफिकेट, मास्टरमाइंड सहित तीन गिरफ्तार

मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने फर्जी डॉक्टरों के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करके लौटे छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) के नकली स्कोरकार्ड और सर्टिफिकेट बनाता था, ताकि वे भारत में डॉक्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन हासिल कर सकें।
 

मुंबई, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र साइबर विभाग ने फर्जी डॉक्टरों के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई करके लौटे छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) के नकली स्कोरकार्ड और सर्टिफिकेट बनाता था, ताकि वे भारत में डॉक्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन हासिल कर सकें।

यह पूरा मामला तब सामने आया, जब महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) ने रजिस्ट्रेशन के लिए आए आवेदनों की जांच की। काउंसिल को शक हुआ कि कुछ विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स ने अनिवार्य एफएमजीई स्क्रीनिंग टेस्ट पास नहीं किया है, फिर भी उनके पास मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मौजूद हैं। एमएमसी की शिकायत पर नोडल साइबर पुलिस स्टेशन, महाराष्ट्र साइबर, मुंबई में एफआईआर दर्ज की गई।

महाराष्ट्र साइबर ने टेक्निकल एनालिसिस, डिजिटल रिकॉर्ड और सिस्टम लॉग्स की गहन जांच के बाद इस फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की पहचान की और अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान वरुण प्रतापराव आखाडे (28) और संकेत प्रभाकर उनहाले (26) के रूप में हुई। दोनों बुलढाणा का रहने वाले हैं। जांच में पता चला है कि ये दोनों खुद एफएमजीई में फेल हो चुके थे, फिर भी फर्जी सर्टिफिकेट बनवाकर डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने की कोशिश कर रहे थे।

तीसरा और सबसे अहम आरोपी राहुल गोपाल पाटील (35) निवासी नासिक इस पूरे अंतरराज्यीय गैंग का मास्टरमाइंड और की ऑपरेटर बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि इसने पैसों के बदले लगभग 15 से 20 आवेदकों के लिए फर्जी स्कोर कार्ड, सर्टिफिकेट और दूसरे दस्तावेज तैयार कर दिए थे।

महाराष्ट्र साइबर विभाग ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और फर्जी दस्तावेज बनाने, ट्रांसमिट करने और इस्तेमाल करने वाले पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन, डिजिटल डिवाइस और कम्युनिकेशन रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है, ताकि इस रैकेट से जुड़े और लोगों की पहचान हो सके।

साइबर विभाग ने सभी विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को कड़ी चेतावनी दी है कि वे किसी भी दलाल के चक्कर में न पड़ें और एफएमजीई जैसे अनिवार्य एग्जाम को बायपास करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल न करें। ऐसा करने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

--आईएएनएस

एससीएच/वीसी