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महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने पर सियासत तेज

मुंबई, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य और भाषा को सीखने के लिए छह महीने की मोहलत देने को लेकर सियासत गरम हो गई है। विपक्ष ने इस फैसले को जबरदस्ती थोपने का आरोप लगाया है।
 
महाराष्ट्र में रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य करने पर सियासत तेज

मुंबई, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य और भाषा को सीखने के लिए छह महीने की मोहलत देने को लेकर सियासत गरम हो गई है। विपक्ष ने इस फैसले को जबरदस्ती थोपने का आरोप लगाया है।

राष्ट्रीय कम्युनिस्ट पार्टी (एसपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "महाराष्ट्र में 60 फीसदी से अधिक मुस्लिम आबादी मराठी बोलती है। वे स्थानीय मराठियों से भी बेहतर मराठी बोलते हैं। 20-30 फीसदी अन्य लोग भी हैं, जो मराठी समझते हैं और बोल सकते हैं। जिन्होंने अभी तक इसे नहीं सीखा है, उन्हें सीख लेना चाहिए। किसी भी भाषा में दक्षता एक मूल्यवान संपत्ति है और हर किसी को इसे सीखना चाहिए।"

एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, "हम मराठी भाषा का सम्मान करते हैं। इसे सीखना, बोलना और पढ़ना चाहिए। मैं वकील भी हूं, इसलिए कई अदालती कार्यवाही, चाहे एफआईआर हो या आरोपपत्र, मराठी में होती हैं, इसलिए हम भी इसे सीखते हैं, लेकिन जबरदस्ती करना कि इतने ही दिनों में मराठी सीखो, ये गलत है।"

कांग्रेस नेता और एमएलसी भाई जगताप ने कहा, "किसी भी राज्य में उस राज्य की भाषा को समझना और सीखना महत्वपूर्ण है, लेकिन मुझे 20 दिन या एक महीने का समय देना बिल्कुल भी सही नहीं था। मैंने यह बात आपके सामने भी साबित कर दी थी।'

शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा, "मराठी हमारी राज्य भाषा है और सभी विद्यालयों में इसे प्राथमिकता दी जाती है। महाराष्ट्र में सभी को मराठी आनी चाहिए। जो लोग इसे नहीं जानते, उन्हें इसे सीखना चाहिए।"

बेस्ट यूनियन के नेता शशांक राव कहते हैं, "मुंबई जैसे शहरों में 80-85 फीसदी ऑटो और रिक्शा चालक मराठी भाषी नहीं हैं। परिवहन विभाग राज्य स्तर पर एक सर्वेक्षण कराने की तैयारी कर रहा है। हमारा अनुमान है कि राज्य स्तर पर भी लगभग 60 फीसदी ऑटो और रिक्शा चालक मराठी भाषी नहीं होंगे।"

कांग्रेस नेता अमीन पटेल ने कहा, "हर राज्य में स्थानीय भाषा को प्राथमिकता दी जाती है। महाराष्ट्र में लोगों को मराठी आनी चाहिए और मेरा मानना ​​है कि लोगों को मराठी सीखनी चाहिए, क्योंकि मुंबई हमारी आर्थिक राजधानी है और पूरे देश से उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, गुजरात तक, सभी लोग अपनी आजीविका के लिए मुंबई आते हैं। मराठी का ज्ञान होना जरूरी है।"

--आईएएनएस

ओपी/डीकेपी