7वीं शताब्दी में निर्मित इस भव्य शिवालय में नहीं हैं नंदी, महादेव संग विराजमान हैं नारायण, माता सती से जुड़ी है कथा
कोल्हापुर, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। देश-दुनिया में देवाधिदेव महादेव की चमत्कार और भक्ति से जुड़े कई शिवालय हैं, मगर महाराष्ट्र के कोल्हापुर में महादेव का एक ऐसा मंदिर है, जो उनके क्रोध से जुड़ा है। खास बात है कि इस शिवालय में महादेव के पास नंदी नहीं, बल्कि नारायण की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर की कथा माता सती से जुड़ी है।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित कोपेश्वर मंदिर आध्यात्मिकता और प्राचीन वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। कोपेश्वर मंदिर न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि प्राचीन भारतीय वास्तुकला और शिल्पकला का भी प्रमाण है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी जटिल नक्काशी व शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है। खिद्रापुर गांव में स्थित इस मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।
कोपेश्वर मंदिर की नींव 7वीं शताब्दी में बादामी चालुक्यों के समय रखी गई थी, लेकिन इसका मुख्य निर्माण 11वीं-12वीं शताब्दी में शिलाहारा राजवंश के राजा गंदरादित्य के काल में पूरा हुआ। यह हेमाडपंथी शैली का उदाहरण है। मंदिर को चार मुख्य भागों में विभाजित किया गया है—स्वर्ग मंडप, सभा मंडप, अंतराल कक्ष और गर्भगृह। इसकी सबसे अनोखी बात यह है कि शिव मंदिर के अंदर भगवान विष्णु की मूर्ति भी स्थापित है। गर्भगृह में उत्तरमुखी शिवलिंग है, जबकि धोपेश्वर की मूर्तियां और नंदी को समर्पित अलग मंदिर भी यहां मौजूद है।
मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं, जानवरों और दैनिक जीवन के दृश्यों की बेहतरीन नक्काशी की गई है। मुख्य द्वार (महाद्वार) पर की गई नक्काशी देखते ही बनती है। स्वर्ग मंडप की छत में खास डिजाइन है, जिससे कुछ विशेष पूर्णिमा पर चंद्रमा ठीक बीच में दिखाई देता है।
मंदिर का नाम ‘कोपेश्वर’ (क्रोधित शिव) एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा से जुड़ा है। जब सती ने अपने पिता दक्ष द्वारा शिव का अपमान सहन न कर आत्मदाह कर लिया, तो भगवान शिव क्रोध से भर गए। भगवान विष्णु ने हस्तक्षेप कर शिव को शांत किया और उन्हें इस स्थान पर लाए। यहां दोनों देवताओं ने पूजा-अर्चना की, इसलिए शिव और विष्णु की एक साथ पूजा यहां विशेष महत्व रखती है। नंदी की अनुपस्थिति भी इसी कथा से जुड़ी है।
मंदिर के आसपास शांत वातावरण है। यहां स्थित पवित्र तालाब में डुबकी लगाना आध्यात्मिक महत्व रखता है। जानकारी के अनुसार, कोपेश्वर मंदिर रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 8 बजे तक खुला रहता है। महाशिवरात्रि, सोमवार समेत अन्य विशेष तिथि या पर्व पर यहां विशेष भीड़ होती है। मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
कोपेश्वर मंदिर कोल्हापुर शहर से लगभग 60 किलोमीटर खिद्रापुर गांव में स्थित है। कोल्हापुर से बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्हापुर या इचलकरंजी है। वहीं, कोल्हापुर एयरपोर्ट लगभग 55-60 किमी दूर स्थित है।
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