घुमंतू समुदाय की समस्याओं के समाधान को लेकर महाराष्ट्र सरकार सख्त, नई व्यवस्था लागू
मुंबई, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में घुमंतू और विमुक्त (मुक्त) समुदाय के समग्र विकास और उनकी समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए बड़ा कदम उठाया है। अन्य पिछड़ा वर्ग बहुजन कल्याण मंत्री अतुल सावे ने बताया कि इस समुदाय के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकने और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए त्रिस्तरीय समितियों का गठन किया गया है।
मंत्री अतुल सावे ने कहा कि राज्य, जिला और उपमंडल स्तर पर गठित इन समितियों के माध्यम से घुमंतू और विमुक्त समुदाय की शिकायतों का त्वरित निवारण किया जाएगा। साथ ही अत्याचार की घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ इन तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से समुदाय के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक विकास को गति मिलेगी और अत्याचार की घटनाओं में भी कमी आएगी।
राज्य स्तरीय समिति की अध्यक्षता मंत्री स्वयं करेंगे, जबकि विभाग के सचिव सदस्य होंगे। पुणे स्थित अन्य पिछड़ा वर्ग बहुजन कल्याण निदेशालय के निदेशक सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे। इसके अलावा संयुक्त सचिव या उप सचिव के साथ घुमंतू समुदाय के लिए काम करने वाले छह गैर-सरकारी सदस्यों को शामिल किया जाएगा, जिनमें कम से कम एक महिला होगी।
जिला स्तर पर समिति की अध्यक्षता जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट करेंगे। इसमें पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला जाति सत्यापन अधिकारी और सहायक निदेशक (ओबीसी बहुजन कल्याण) शामिल होंगे। इसके साथ ही घुमंतू समुदाय से चार गैर-सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा।
उपमंडल स्तर पर समिति की अध्यक्षता उपमंडल अधिकारी या उप जिला कलेक्टर करेंगे। इसमें उपमंडल पुलिस अधिकारी, तहसीलदार, समूह विकास अधिकारी, समूह शिक्षा अधिकारी और संबंधित थाने के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही खानाबदोश और विमुक्त समुदाय से दो गैर-सरकारी सदस्यों को भी जोड़ा जाएगा।
इन समितियों का मुख्य कार्य घुमंतू और विमुक्त समुदाय के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर तुरंत संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज कराना, पीड़ितों को चिकित्सा और कानूनी सहायता दिलाना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना होगा।
इसके अलावा समुदाय में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए शिविर आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य जांच, सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ पहुंचाने, अंधविश्वास खत्म करने और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
शिक्षा को बढ़ावा देने, बच्चों का स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित करने और शैक्षिक योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। साथ ही सड़क, बिजली, पानी और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा रोजगार योजनाओं के जरिए आर्थिकसशक्तीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
--आईएएनएस
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