महाकाल मंदिर में दर्शन करने पहुंचे युजवेंद्र चहल, बताया भस्म आरती का अनुभव
उज्जैन, 19 जून (आईएएनएस)। श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार (ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष पंचमी) को बाबा महाकाल की भस्म आरती की गई। बाबा महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषण अर्पित कर शृंगार किया गया। ईद दौरान क्रिकेटर युजवेंद्र चहल भी वहां दर्शन करने पहुंचे। आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे बहुत अच्छा लगा। यह मेरा पहला भस्म आरती का अनुभव था और सब कुछ बहुत आसानी से हो गया। यहां जिस तरह से लोगों को मैनेज और गाइड किया गया, वह वाकई तारीफ के काबिल था।"
शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। दिव्य शृंगार और भस्म आरती के बाद जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, "जय श्री महाकाल" के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। मंदिर परिसर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।
मंदिर के पट खुलने के साथ ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। भगवान महाकाल का रजत चंद्र, त्रिशूल, मुकुट और आभूषण अर्पित कर श्रृंगार किया गया।
महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिवार देर रात से ही बाबा के दर्शन करने के लिए लाइन में खड़े रहे।
जानकारी के मुताबिक पहले महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है।
बाबा महाकाल की आरती देश-विदेश में मशहूर है, जिसे देखने के लिए जनसमान्य से लेकर बड़ी हस्तियां भी आती हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है।
--आईएएनएस
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