मध्य-पूर्व संकट के बीच पेट्रोल-डीजल-सीएनजी महंगे, भाजपा ने कहा- भारत में सबसे कम बढ़ोतरी
नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज संकट के बीच भारत में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ रहा है। इस मुद्दे पर भाजपा और सहयोगी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार का समर्थन किया है।
हैदराबाद में भाजपा तेलंगाना प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने कहा, "होर्मुज संकट और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण पूरी दुनिया तेल की कमी से जूझ रही है। कई देशों में तेल राशनिंग चल रही है और कीमतें 20 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। भारतीय तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय रेट के अनुसार चल रही हैं, लेकिन आम लोगों पर बोझ न पड़े, इसके लिए सावधानी बरती जा रही है। भारत में हुई बढ़ोतरी दूसरे देशों की तुलना में बहुत कम है।"
इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा, "अगर दुनिया में कोई देश है जिसने पेट्रोल-डीजल की कीमतें सबसे देर से और सबसे कम बढ़ाई हैं, तो वह भारत है। अमेरिका, यूरोप और अन्य विकसित देशों में कीमतें बहुत पहले बढ़ चुकी थीं। पिछले 10 सालों से यही स्थिति रही है। जहां-जहां भाजपा सरकार है, वहां ईंधन की कीमतें और सब्सिडी की तुलना कांग्रेस शासित राज्यों से करें, अंतर साफ दिख जाएगा।"
एलजेपी (आरवी) सांसद राजेश वर्मा ने कहा, "सत्ता पक्ष और विपक्ष सभी को समझना चाहिए कि युद्ध के बाद वैश्विक आर्थिक संकट आया है। प्रधानमंत्री ने पहले ही संकेत दे दिया था कि हमें डीजल और पेट्रोल का उपयोग जितना हो सके कम करना चाहिए। कई जगहों पर वर्क फ्रॉम होम भी चल रहा है। अब समय है कि सभी पार्टियां और लोग एक साथ आएं और एक-दूसरे का साथ दें।"
बता दें कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा है। सरकार ने अभी तक कीमतों में एक साथ बड़ी बढ़ोतरी नहीं की है, बल्कि छोटे-छोटे चरणों में समायोजन किया जा रहा है।
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