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मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गौशाला में 5 हजार गौवंश की बाध्यता: लखन पटेल

भोपाल, 27 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने कहा कि स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 गोकुल धाम स्थापना नीति में न्यूनतम पांच हजार गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिसमें से 30 प्रतिशत गौवंश दुधारू नस्ल के होने चाहिए। मंत्री पटेल ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग अंतर्गत गौसंवर्धन बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की।
 
मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गौशाला में 5 हजार गौवंश की बाध्यता: लखन पटेल

भोपाल, 27 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार लखन पटेल ने कहा कि स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 गोकुल धाम स्थापना नीति में न्यूनतम पांच हजार गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिसमें से 30 प्रतिशत गौवंश दुधारू नस्ल के होने चाहिए। मंत्री पटेल ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग अंतर्गत गौसंवर्धन बोर्ड के कार्यों की समीक्षा की।

इस दौरान उन्होंने स्वावलंबी गौशाला नीति 2025 गोकुल धाम स्थापना नीति अंतर्गत जारी निविदा में प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि उक्त नीति अंतर्गत परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पांच हजार गौवंश का पालन अनिवार्य है, जिसमें से 30 प्रतिशत गौवंश दुधारू नस्ल के होने चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रत्येक 5000 गौवंश के लिए अधिकतम 125 एकड़ शासकीय भूमि उपयोग के अधिकार के आधार पर दी जाएगी। अतिरिक्त 1000 गौवंश की वृद्धि पर 25 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जाएगी। इसके साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि दी जा सकेगी।

वहीं, निराश्रित गौवंशों के लिए शासन की नीति अनुसार प्रति दिवस प्रति गौवंश अनुदान राशि 40 रुपए दी जा रही है। राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश स्वावलंबी गौशाला (गोकुल धाम) की स्थापना की नीति 2025 का मुख्य उद्देश्य है प्रदेश में वृहद स्वावलंबी गौशालाओं का मॉडल तैयार करना, निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, जहां उन्हे संतुलित आहार, व्यवस्थित आवास एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो सके।

इसके साथ ही बजट पर न्यूनतम भार पर अधिकाधिक निराश्रित गौवंश का उपयुक्त व्यवस्थापन करना, वृहद गौशालाओं की परियोजनाओं के माध्यम से पड़त भूमि का विकास तथा निजी भागीदारी के माध्यम से गौ-उत्पादों के निर्माण एवं विपणन की श्रृंखला तैयार करना है। इसके अलावा वैकल्पिक ऊर्जा निर्मित करने की नवीन तकनीकों के लिए निजी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी तैयार करना है।

राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि निराश्रित गौवंश के प्रबंधन, उपयोगिता वृद्धि एवं बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इकाइयों के लिए स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना की जाएगी। निजी निवेश व भागीदारी के माध्यम से गोपालन, दुग्ध प्रसंस्करण, जैविक खाद, पंचगव्य, बायो सीएन जी, औषधि व पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। 30 प्रतिशत उच्च उत्पादक नस्ल की गायें, दुग्ध उत्पादन व प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा।

गोबर व कृषि अवशेष से एन पी के युक्त जैविक खाद, मिट्टी की उर्वरता व उत्पादन में वृद्धि होगी। बायोगैस सी एन जी व सोलर ऊर्जा संयंत्र; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन। प्रकृति के नज़दीक रमणीक स्थानों पर स्थित गौशालाएं, प्रदर्शन, प्रबंधन व प्रोसेसिंग से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीकेपी