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मध्य प्रदेश की मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र के मामले में हाई कोर्ट सख्त: कांग्रेस

भोपाल, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र के विवाद का मामला उच्च न्यायालय जबलपुर में चल रहा है। कांग्रेस का दावा है कि इस मामले में उच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई है और दो माह में जांच कर निर्णय सौंपने का निर्देश दिया है।
 
मध्य प्रदेश की मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र के मामले में हाई कोर्ट सख्त: कांग्रेस

भोपाल, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र के विवाद का मामला उच्च न्यायालय जबलपुर में चल रहा है। कांग्रेस का दावा है कि इस मामले में उच्च न्यायालय ने सरकार को फटकार लगाई है और दो माह में जांच कर निर्णय सौंपने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच, न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति अविनेंद्र कुमार सिंह ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले लगभग एक वर्ष से इस मामले की जांच लंबित क्यों रखी गई और इसे दबाकर क्यों रखा गया। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि उच्च स्तरीय छानबीन समिति इस मामले की 60 दिनों (दो माह) के भीतर जांच कर निर्णय प्रस्तुत करे। कोर्ट ने 20 जून तक का समय छानबीन समिति को दिया है।

दरअसल, लगभग एक साल पहले प्रदीप अहिरवार द्वारा राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उच्च स्तरीय जांच समिति में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सामान्य वर्ग के राजपूत समाज से संबंध रखने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है। प्रदीप अहिरवार ने इस मामले में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि मंत्री प्रतिमा बागरी अब महज दो महीने की मंत्री ही शेष बची हुई हैं। उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाएगा और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार अधिकारियों और अपने मंत्रियों को बचाने में लगी हुई है। प्रारंभिक रूप से यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि प्रतिमा बागरी का जाति प्रमाण पत्र संदिग्ध है, इसलिए छानबीन समिति लगातार दबाव में आकर जांच को धीमा रखे हुए थी। शिकायत दर्ज होने के एक साल बाद तक भी जांच पूरी नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें मजबूर होकर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।

उनका आरोप है कि राज्य सरकार लगातार अपने मंत्रियों को संरक्षण देते हुए जांच प्रक्रिया को प्रभावित करती रही है। अहिरवार ने कहा कि यह मामला सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। यदि कोई व्यक्ति गलत तरीके से अनुसूचित जाति का लाभ प्राप्त करता है, तो यह वास्तविक पात्र लोगों के अधिकारों का सीधा हनन है। अहिरवार ने मांग की है कि इस मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों के परिपालन में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए तथा दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

--आईएएनएस

एसएनपी/डीएससी