Aapka Rajasthan

मध्य प्रदेश के इस गांव में दशहरे पर रावण और कुंभकर्ण की होती है पूजा, मन्नत पूरी होने पर होता है भंडारा

राजगढ़, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक ऐसा गांव है जहां दशहरे की परंपरा बाकी पूरे देश से बिल्कुल अलग है। जहां पूरे देश में दशहरे पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं राजगढ़ के भाटखेड़ी गांव में ग्रामीण रावण और कुंभकर्ण की पूजा करते हैं। इस गांव को रावण वाली भाटखेड़ी भी कहा जाता है।
 

राजगढ़, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक ऐसा गांव है जहां दशहरे की परंपरा बाकी पूरे देश से बिल्कुल अलग है। जहां पूरे देश में दशहरे पर रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं राजगढ़ के भाटखेड़ी गांव में ग्रामीण रावण और कुंभकर्ण की पूजा करते हैं। इस गांव को रावण वाली भाटखेड़ी भी कहा जाता है।

यहां के लोगों की मान्यता है कि रावण उनकी मनोकामनाएं पूरी करता है। अपनी मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां आकर प्रार्थना करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं तथा भंडारे का आयोजन किया जाता है।

दशहरे से पहले यहां स्थापित रावण और कुंभकर्ण की मूर्तियों को नए रंगों से रंगा जाता है। दशहरे के दिन त्योहार मनाया जाता है और उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकार उन्हें भाले से स्पर्श करते हैं और गांव की समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।

इस अनोखी परंपरा को लेकर गांव के निवासी जगदीश चंद्र यादव ने पत्रकारों से बताया, "यह परंपरा बहुत पुरानी है। बहुत पहले से, जब हम छोटे बच्चे थे, तब से हमारे पूर्वज यहां आते थे। यहां रामलीला का मंचन होता है और नवरात्र के सभी नौ दिनों तक गांव में रामलीला होती है। दशहरे पर भव्य जुलूस निकाला जाता है, यहां लाकर रामलीला का मंचन किया जाता है और उसके बाद यहां रावण की पूजा की जाती है। यहां रावण को जलाया नहीं जाता।"

उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार, उनका गांव पहले हनुमान जी के मंदिर के पास बसा था। उनके पूर्वजों को एकांत पसंद था, इसलिए वे सड़क के इस तरफ आकर बस गए। हनुमान जी के पास ही उनके पूर्वजों ने बहुत पहले मिट्टी से रावण और कुंभकर्ण की मूर्तियां बनाई थीं। जब भी गांव पर कोई संकट आता या किसी परिवार को संतान न होने जैसी समस्या होती, तो लोग यहां मन्नत मांगते और उनकी इच्छा पूरी हो जाती थी।

गांव के ही कृष्णपाल सिंह ने कहा कि यहां मान्यता है कि दुनिया में कहीं से भी जो लोग यहां आते हैं, उनकी मनोकामना पूरी होती है। यह परंपरा उनके पूर्वजों ने शुरू की थी, जो आज भी जारी है।

वहीं, आरसी यादव ने बताया कि वे अपने पूर्वजों द्वारा शुरू की गई परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं। वे रामलीला का मंचन करते हुए इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। यहां वे रावण और कुंभकर्ण की पूजा करते हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस