मध्य प्रदेश आधुनिक तकनीक और निवेश के लिए देश का सबसे अनुकूल राज्य: सीएम मोहन यादव
भोपाल, 22 सितंबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश आधुनिक तकनीक और निवेश के लिए देश का सबसे अनुकूल राज्य है। देश के हृदय स्थल में स्थित मध्यप्रदेश को अपने केंद्रीय भौगोलिक स्थान, मजबूत बुनियादी ढांचे और सरप्लस बिजली का अभूतपूर्व लाभ प्राप्त है। राज्य में उद्योग अनुकूल वातावरण का ही परिणाम है कि विगत पौने तीन वर्षों में लगभग सभी सेक्टरों में 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश राज्य की धरती पर उतर चुका है। उन्होंने यह बात बेंगलुरु में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (टीएमजेड) में निवेश आकर्षित करने के लिए आयोजित राउंड टेबल बैठक में निवेशकों से संवाद के दौरान कही।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि समय को सही अवसर पर पहचान कर निर्णय लेना ही एक सफल उद्यमी की पहचान है। दिल्ली और मुंबई के रोड-शो में निवेशकों से मिले सकारात्मक प्रतिसाद से स्पष्ट है कि उद्योग जगत का भरोसा मध्यप्रदेश पर निरंतर मजबूत हुआ है। निवेशकों के लिए मध्यप्रदेश में निवेश करने का यही सही समय है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सहयोग से केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश शासन ने मिलकर टेलीकॉम सेक्टर में एक नया और ऐतिहासिक मॉडल स्थापित किया है। ग्वालियर में बन रहा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन इसी साझी सोच का प्रतिफल है।उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में भूमि सीमित है, इसलिए ‘पहले आओ-पहले पाओ’ के आधार पर आने वाले निवेशकों को विशेष लाभ मिलेगा, जबकि आगामी चरणों में नियम व शर्तें भिन्न होंगी। इस औद्योगिक पार्क में एक ही स्थान पर डिजाइन से लेकर डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग से लेकर टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन से लेकर एक्सपोर्ट तक की पूरी वैल्यू चेन का निर्माण होगा। यहां सिम से लेकर सैटेलाइट कम्युनिकेशन के उपकरण, 5-जी और 6-जी के उपकरण, ऑप्टिकल फायबर और आईओटी से जुड़े उत्पाद बनाए जाएंगे।
उन्होंने राज्य के औद्योगिक पार्कों की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि धार में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मोत्सव 2025 पर 2,000 एकड़ के ‘पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क’ का भूमिपूजन हुआ था और उसी दौरान पार्क का एक-एक प्लॉट बुक हो गया। इसी प्रकार मोहासा-बाबई में नवकरणीय ऊर्जा उपकरण पार्क पहले, दूसरे और तीसरे चरण पूरी तरह बुक होने के बाद अब चौथे चरण पर कार्य शुरू हो चुका है। पीथमपुर, अवंतिका और विक्रम उद्योगपुरी जैसे क्षेत्रों में भी निवेशकों का भारी विश्वास देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पिछले 9 महीनों में ही रक्षा से लेकर खाद्य सुरक्षा तक, ट्रांसफॉर्मर से टेलीकॉम तक, हेल्थकेयर से लेकर लाइफकेयर तक, टेक्सटाइल से लेकर टेक्नोलॉजी तक, ऑप्टिकल फायबर केबल्स से लेकर ऑटोमोबाइल पार्ट्स तक, नवकरणीय ऊर्जा उपकरण से लेकर रेलवे और भारी वाहनों के निर्माण तक मध्यप्रदेश में लगभग 15 विनिर्माण इकाइयां लगी हैं।उन्होंने बेंगलुरु के तकनीकी उद्यमियों और निवेशकों को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश सरकार उनके हर निवेश को सुरक्षित, सफल और गतिमान बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ उनके साथ खड़ी है। विगत ढाई वर्षों में 25 से अधिक सेक्टर-विशेष ‘इन्वेस्टमेंट-फ्रेंडली’ नीतियां लागू की गई हैं, जिनसे उद्योगों को लगाने और संचालन में सुविधा मिलेगी।
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री सिंधिया ने राउंड टेबल बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि जिस प्रकार देश में सेमीकंडक्टर फैब और विमान विनिर्माण जैसी ऐतिहासिक परियोजनाएं धरातल पर उतरी हैं, उसी तर्ज पर ग्वालियर में देश का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित किया जा रहा है। यह पार्क टेलीकॉम के सभी 7 प्रमुख वर्टिकल्स ओईएम, ऑप्टिकल फायबर केबल, डेटा सेंटर व उपकरण, सेमीकंडक्टर चिपसेट, एक्टिव-पैसिव कंपोनेंट्स, टीएसपी-आईटी सेवाएं और ईएमएस/पीसीबी विनिर्माण को एक संपूर्ण इको सिस्टम के रूप में समाहित करेगा।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप भारत अब ‘सर्विस ड्रिवन’ से ‘प्रोडक्ट ड्रिवन’ अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि वैल्यू चेन में वास्तविक मूल्य और बौद्धिक संपदा उत्पादों के विनिर्माण और डिजाइनिंग में निहित है। देश का लक्ष्य केवल ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘डिजाइन इन इंडिया’, ‘मेक फॉर इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ के संकल्प को साकार करना है।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने मुख्यमंत्री यादव के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति सरकार और निजी क्षेत्र के साझा विचार-विमर्श से तैयार की गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि 12,000 करोड़ रुपए के कैपेक्स पर लगभग 8,000 करोड़ रुपए का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज दिया जाना विश्व स्तर पर अभूतपूर्व है। यह पैकेज केवल कैपेक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली, पंजीकरण शुल्क और कौशल प्रशिक्षण पर सब्सिडी देकर कंपनियों के परिचालन व्यय को भी न्यूनतम करता है। केंद्र और राज्य के 51:49 के संयुक्त एसपीवी के माध्यम से निवेशकों की प्रत्येक समस्या का समाधान 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने निवेशकों का आह्वान करते हुए कहा कि रोडशो के पहले चरण में शामिल होने वाले निवेशकों को ही यह ऐतिहासिक लाभ प्राप्त होगा। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के रोडशो से अब तक लगभग 24-25 कंपनियों से 5,500 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश और 17,000 से अधिक रोजगार सृजन के प्रस्ताव मिल चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी भूमि-पूजन के बाद प्रथम चरण बंद हो जाएगा और दूसरे चरण में आने वाले निवेशकों को ये रियायतें इस स्तर पर उपलब्ध नहीं होंगी, इसलिए उद्यमियों को इस चरण में तत्काल जुड़ना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने ग्वालियर की रणनीतिक खूबियों को रेखांकित करते हुए कहा कि ग्वालियर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ‘काउंटर मैग्नेट सिटी’ के रूप में विकसित किया गया है, जो 100 एकड़ काउंटर मैग्नेट क्षेत्र और 70 एकड़ एसटीपीआई क्षेत्र में विस्तृत है। ग्वालियर दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से सीधी हवाई सेवा से जुड़ा है। यहां 5,500 करोड़ रुपए की लागत से 6-लेन हाई-स्पीड आगरा-ग्वालियर एक्सप्रेस-वे तैयार किया जा रहा है, जिससे आगरा की दूरी मात्र 40 मिनट में तय होगी। इसके साथ ही 600 करोड़ रूपये का नया एयरपोर्ट, 600 करोड़ रुपए का आधुनिक रेलवे स्टेशन, 40 से 50 इंजीनियरिंग कॉलेजों से प्रतिवर्ष निकलने वाले 10 से 12 हजार प्रशिक्षित इंजीनियर्स ग्वालियर को विनिर्माण के लिए देश का सबसे आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं।
केंद्रीय दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल ने कहा कि ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन देश की एक अत्यंत अनूठी और ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि यह भारत का एकमात्र ऐसा समर्पित मैन्युफैक्चरिंग जोन है, जहां टेलीकॉम सेक्टर के सभी वर्टिकल्स और संपूर्ण इको सिस्टम को एक ही स्थान पर लाने का प्रभावी प्रयास किया गया है। सचिव अग्रवाल ने बताया कि इस परियोजना के लिए भारत सरकार द्वारा एक अत्यंत आकर्षक पैकेज स्वीकृत किया गया है, मध्यप्रदेश शासन की ओर से भी निवेशकों को विशेष नीतिगत प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। केंद्र और राज्य का यह साझा सहयोग निवेशकों के जोखिम को कम कर विनिर्माण के लिए आदर्श वातावरण तैयार करता है।
अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई ने प्रेजेंटेशन से टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन ग्वालियर की विशेषताओं और निवेशकों को दिए जा रहे आकर्षक लाभ और सुविधाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना मध्यप्रदेश शासन और भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के बीच 51:49 की इक्विटी भागीदारी वाले एसपीवी के माध्यम से विकसित की जा रही है, जिसमें एमपीआईडीसी मास्टर डेवलपर है। उन्होंने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत जोन में लगभग 500 करोड़ रुपए की लागत से 5जी, आईओटी और सैटेलाइट उपकरणों के लिए साझा टेस्टिंग व सर्टिफिकेशन लैब स्थापित की जा रही है। निवेशकों को 170 एकड़ के विकसित पार्क में मात्र 1 रुपए के टोकन प्रीमियम पर भूमि, 30 वर्षों हेतु 1 रुपए प्रति वर्ग मीटर लीज रेंट और शत-प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी छूट दी जा रही है। इसके साथ ही प्लांट व मशीनरी पर 50 प्रतिशत प्रत्यक्ष पूंजीगत अनुदान, 5 वर्षों तक बिजली पर 2 रूपये प्रति यूनिट सब्सिडी, प्रति कर्मचारी 5,000 रुपए मासिक सहायता तथा 30,000 रुपए वार्षिक कौशल प्रशिक्षण अनुदान का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय मंत्री सिंधिया के नेतृत्व में दूरसंचार विभाग ने जुलाई 2026 में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद अगस्त में दिल्ली और मुंबई में निवेशक सम्मेलन आयोजित किए गए। दिल्ली में निवेशक सम्मेलन में लगभग 3,500 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं सामने आईं, जिससे करीब 14,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है। अगस्त में मुंबई में आयोजित सम्मेलन में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिलीं, जिनसे करीब 4,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके परिणामस्वरूप अब 24 कंपनियों ने दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राउंड टेबल बैठक में उपस्थित देश-विदेश की प्रमुख टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी कंपनियों के प्रमुखों एवं उद्योगपतियों ने मध्यप्रदेश की निवेश हितैषी नीतियों, पारदर्शी कार्यप्रणाली और उद्योग अनुकूल वातावरण की मुक्तकंठ से सराहना की। निवेशकों ने कहा कि ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से दिया जा रहा ऐतिहासिक प्रोत्साहन पैकेज, नाममात्र दर पर विकसित भूमि, रियायती बिजली-पानी और अत्याधुनिक साझा टेस्टिंग लैब्स की व्यवस्था विनिर्माण क्षेत्र में कंपनियों के वित्तीय जोखिम को काफी कम करती है।
उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य में लागू ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों, 5 वर्ष की निरीक्षण-मुक्त व्यवस्था और समस्याओं के 48 घंटे में समाधान की प्रतिबद्धता पर गहरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि देश के मध्य में स्थित होने, दिल्ली-एनसीआर से सीधी कनेक्टिविटी और प्रचुर तकनीकी मानव संसाधन के चलते मध्यप्रदेश देश में हाई-टेक टेलीकॉम विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनने की आदर्श क्षमता रखता है। बैठक में शामिल कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने ग्वालियर जोन में अपनी इकाइयां स्थापित करने और आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में भागीदारी के प्रति उत्साह दिखाया। राउंड टेबल मीटिंग में प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एम. सेलवेंद्रन, प्रबंध संचालक एमपीआईडीसी चंद्रमौली शुक्ला सहित 25 से अधिक टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी कंपनियों के उद्यमी एवं निवेशक, केंद्र व राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारीगण और स्टार्ट-अप लीडर्स उपस्थित रहे।
--आईएएनएस
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