मदरसों में 'वंदे मातरम' अनिवार्य करने पर मुस्लिम संगठनों ने की बहिष्कार की अपील
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गायन को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर विभिन्न मुस्लिम संगठनों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जब से सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल में मुख्यमंत्री का पदभार संभाला है, तब से वहां एक के बाद एक विवाद खड़े करने की कोशिशें की जा रही हैं। असम की तर्ज पर बंगाल के मदरसों को भी निशाना बनाया जा रहा है और ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य कर दिया गया है। जो कोई भी इसे पढ़ना चाहता है, मैं उसे रोक नहीं रहा हूँ, लेकिन जो लोग इसे नहीं पढ़ना चाहते, उन पर दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।”
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. उमर अहमद इलियासी ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ हो या ‘मादरे वतन जिंदाबाद’, दोनों का भाव देशभक्ति और भारत की जय-जयकार है। इस्लाम में इबादत और वंदना केवल ईश्वर की की जाती है, इसलिए कुछ लोग ‘वंदे मातरम’ की जगह ‘मादरे वतन जिंदाबाद’ कहते हैं। हिंदू संस्कृत में ‘वंदे मातरम’ कहते हैं और मुसलमान उर्दू में ‘मादरे वतन जिंदाबाद’ कहते हैं, लेकिन भावना एक ही है। यह राष्ट्र का गीत है और इस मुद्दे पर किसी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
डॉ. उमर अहमद इलियासी ने महंत योगी आदित्यनाथ के नमाज संबंधी बयान को सही बताते हुए कहा, “नमाज खुदा और बंदे के बीच की इबादत है और उसकी जगह मस्जिद है, सड़क नहीं। सड़क पर नमाज पढ़ना सही नहीं है क्योंकि नमाज के नियम में अनुमति लेना शामिल है। अगर प्रशासन या सरकार सड़क पर नमाज की अनुमति नहीं देती, तो सड़क पर नमाज बिल्कुल नहीं हो सकती।”
उन्होंने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का स्वागत करते हुए कहा, “यह अच्छी बात है कि मुस्लिम समाज की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग हो रही है। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन वर्षों से इस बात को कहता आया है। गाय एक प्राणी नहीं, विश्व का प्राण है। गाय हिंदुओं की आस्था है। गाय का दूध शिफा है, गाय का घी दवा है, गाय का मीट बीमारी है। मैं तमाम मुसलमानों से अपील करता हूं कि प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी न करें।”
दारुल उलूम फिरंगी महल के प्रवक्ता मौलाना सूफियान निज़ामी ने पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले का पुरजोर विरोध करते हुए कहा, “हम पश्चिम बंगाल सरकार के उस फैसले का पुरजोर विरोध करते हैं, जिसके तहत मदरसों और सभी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। हम मुसलमानों से अपील करते हैं कि जहां भी ऐसी स्थिति पैदा हो, जहां इसका गायन अनिवार्य किया जाए, वे अपने बच्चों को ऐसे संस्थानों में दाखिला न दिलाएं।”
एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, “हम ‘वंदे मातरम’ का सम्मान करते हैं और उसे बहुत आदर की दृष्टि से देखते हैं, लेकिन संविधान का अनुच्छेद 25 हमें अपने धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार देता है। यदि मुसलमानों के लिए ‘वंदे मातरम’ में कुछ ऐसी पंक्तियां हैं जिनकी इस्लाम अनुमति नहीं देता।
पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मदरसों में "वंदे मातरम" को अनिवार्य किए जाने पर, भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, "चाहे स्कूल हों या मदरसे, ‘वंदे मातरम’ हमारा राष्ट्रीय गीत है। ‘वंदे मातरम’ देशभक्ति की भावना जगाता है।"
--आईएएनएस
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