मां पार्वती के साथ विराजमान हैं शालिग्राम और चक्रपाणि भैरव, अद्भुत है नेपाल का गंडकी चंडी शक्तिपीठ मंदिर
नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। हमारे पुराणों में 51 शक्तिपीठ मंदिरों का वर्णन किया गया है, जिनकी उत्पत्ति मां सति के गिरने वाले अंगों से हुई है, लेकिन सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में भी मां के शक्तिशाली शक्तिपीठ मंदिर स्थापित हैं।
आज हम बात करेंगे नेपाल के ऐसे शक्तिपीठ मंदिर की, जहां मां के दर्शन के साथ बाबा महाकाल भक्तों को मोक्ष देने के लिए विराजमान हैं और भगवान विष्णु भी शालिग्राम के रूप में स्थापित हैं।
गंडकी शक्तिपीठ या मुक्तिनाथ मंदिर एक विष्णु मंदिर है, जो हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के लिए पवित्र है। यह नेपाल के मुस्तांग में, मुक्तिनाथ घाटी में, थोरोंग ला पर्वत दर्रे के तल पर स्थित है। 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह विश्व के सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है। यह हिंदू धर्म के 108 दिव्य देशमों में से एक है और भारत के बाहर स्थित एकमात्र दिव्य देशम है। इसे मुक्ति क्षेत्र के नाम से जाना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ "मोक्ष का क्षेत्र" है।
ऐसा माना जाता है कि गंडकी नदी में स्नान करने वाले लोगों के पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है, क्योंकि भगवान विष्णु के मंदिर के निर्माण में उपयोग किए गए पवित्र शालिग्राम पत्थर गंडकी नदी में मौजूद हैं। गंडकी शक्तिपीठ बेहद खास है क्योंकि मां पार्वती के इर्द-गिर्द स्वयं भगवान शिव और विष्णु रक्षा के लिए मौजूद हैं। मुक्तिनाथ मंदिर के भीतर ही मां सती के गंडकी चंडी रूप की पूजा की जाती है। मां हाथों में अस्त्र लेकर रौद्र रूप में गर्भगृह में मौजूद हैं, जबकि भगवान विष्णु बेहद शांत और ध्यान की स्थिति में मौजूद हैं।
खास बात यह भी है कि मंदिर का इतिहास सिर्फ हिंदू धर्म से ही नहीं, बल्कि बौद्ध धर्म से भी जुड़ा है। बौद्ध धर्म से जुड़े लोग मुक्तिनाथ मंदिर को 'चुमिंग ग्यात्सा' के नाम से पुकारते हैं, यानि मोक्ष देने वाले भगवान। यहां सौ छोटे-छोटे झरने बहते हैं। माना जाता है कि 100 धाराओं में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष भी मिलता है। यही कारण है कि भक्ति में आने वाले सभी भक्त 100 धाराओं के नीचे स्नान करते हैं।
वहीं मां गंडकी चंडी की रक्षा हेतू भगवान शिव भी चक्रपाणि भैरव के रूप में मौजूद हैं। माना जाता है कि अगर भक्त शत्रुओं से परेशान है या किसी रोग की वजह से अत्याधिक बीमार है, तो चक्रपाणि भैरव के दर्शन करने से मन और तन दोनों के विकार दूर होते हैं। अगर आप नेपाल आए तो मंदिर में दर्शन के बाद गंडकी नदी में स्नान कर सकते हैं, जिसे नेपाल की गंगा कहा जाता है। इसी नदी में शालिग्राम पत्थर पाया जाता है, जो हिंदू धर्म में बेहद पूजनीय है।
--आईएएनएस
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