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लुंगीवाला पर घमासान: जॉन ब्रिटास की आपत्ति पर बोलीं सुष्मिता देव- नहीं की वेशभूषा पर टिप्पणी

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा में बुधवार को वेशभूषा को लेकर की गई कथित टिप्पणी का मुद्दा उठने के बाद सदन में इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया गया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने एक सदस्य द्वारा उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहे जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़ा मामला बताया था। इसके बाद अब भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने सदन में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी व्यक्ति, राज्य या वहां की संस्कृति व वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की।
 

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा में बुधवार को वेशभूषा को लेकर की गई कथित टिप्पणी का मुद्दा उठने के बाद सदन में इसे लेकर स्पष्टीकरण दिया गया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने एक सदस्य द्वारा उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहे जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान से जुड़ा मामला बताया था। इसके बाद अब भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने सदन में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी व्यक्ति, राज्य या वहां की संस्कृति व वेशभूषा पर कोई टिप्पणी नहीं की।

सुष्मिता देव ने राज्यसभा में कहा कि वह इस बात को सदन के रिकॉर्ड पर रखना चाहती हैं कि सदन से ऐसा कोई संदेश नहीं जाना चाहिए कि कोई सदस्य भारत को सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर विभाजित करना चाहता है। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं असम से आती हूं। मैं असम की बंगाली हूं। मैंने पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों को देखा है, जहां हम अलग-अलग तरह की पोशाक और वेशभूषा पहनते हैं, इसलिए न तो मैंने और न ही किसी सदस्य ने कभी किसी राज्य की वेशभूषा पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की है। मैं यह बात सदन के रिकॉर्ड पर रखना चाहती थी।”

सुष्मिता देव ने कहा कि यह मुद्दा सदस्य जॉन ब्रिटास ने उठाया था। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटास को लगता है कि उन्हें उनसे व्यक्तिगत रूप से कुछ कहना चाहिए या इस संबंध में बातचीत करनी चाहिए तो वह इसके लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “अगर उन्हें लगता है कि मुझे उनसे संपर्क करके कुछ कहना चाहिए तो मुझे इसमें खुशी होगी। मैं केरल, पूर्वोत्तर और कर्नाटक के लोगों से प्रेम करती हूं।”

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले को किसी क्षेत्र, भाषा, संस्कृति या वेशभूषा के बीच विभाजन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

वहीं, राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने दोनों सदस्यों को अपने कक्ष में बातचीत का सुझाव दिया। मामले को शांत करने की कोशिश करते हुए सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वे दोनों सदस्यों को अपने कक्ष में आकर बातचीत करने के लिए आमंत्रित करते हैं। इससे आपसी भ्रम और गलतफहमी को दूर किया जा सकेगा।

नड्डा ने कहा, “इस विषय पर मैं एक ही निवेदन करना चाहूंगा कि दोनों सदस्य अगर मेरे कक्ष में आ जाएंगे तो आपस में जो भ्रम और गलतफहमी हुई है, उसे हम स्पष्ट कर सकेंगे और आप दोनों के बीच अच्छे और सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित हो सकेंगे।”

उन्होंने दोनों सदस्यों के लिए कहा कि सदन में अपनी-अपनी बात रखने के बाद आपसी गलतफहमी को दूर किया जा सकता है। नड्डा ने सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया। इससे पहले राज्यसभा में सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कथित तौर पर एक सदस्य द्वारा उन्हें ‘लुंगी वाला’ कहे जाने का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने कहा कि वह भारी मन से इस विषय को उठा रहे हैं, क्योंकि यह केवल उनका व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि सदन की गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। ब्रिटास ने कहा था, “भारी मन से मैं यह मुद्दा उठा रहा हूं, क्योंकि यह इस सदन की गरिमा, प्रतिष्ठा और सम्मान का सवाल है। यह किसी एक दल का नहीं, बल्कि सभी दलों से जुड़ा मुद्दा है।”

--आईएएनएस

जीसीबी/डीकेपी