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लखनऊ में पुलिस या सैन्यकर्मी की टारगेट किलिंग की साजिश नाकाम, पाकिस्तानी हैंडलर के इशारे पर पहुंचे तीन गिरफ्तार

लखनऊ, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सैन्यकर्मी की टारगेट किलिंग की साजिश नाकाम करते हुए प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को पुलिस निगरानी में लिया गया है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर राणा भाई के निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे। उन्हें किसी पुलिस या सेना के जवान की हत्या कर उसका वीडियो हैंडलर को भेजने का टास्क दिया गया था।
 

लखनऊ, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सैन्यकर्मी की टारगेट किलिंग की साजिश नाकाम करते हुए प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (एसबीएन) से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को पुलिस निगरानी में लिया गया है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर राणा भाई के निर्देश पर लखनऊ पहुंचे थे। उन्हें किसी पुलिस या सेना के जवान की हत्या कर उसका वीडियो हैंडलर को भेजने का टास्क दिया गया था।

एटीएस ने आरोपियों के कब्जे से एक विदेशी पिस्टल और 20 विदेशी कारतूस बरामद किए हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, एटीएस को इनपुट मिल रहे थे कि प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क के सदस्य पंजाब के युवकों के माध्यम से भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और सेना-पुलिस से जुड़े प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर जांच में गगनदीप सिंह और उसके साथियों के पाकिस्तानी हैंडलर राणा भाई के संपर्क में होने की जानकारी मिली।

इसके बाद एटीएस ने कार्रवाई करते हुए 30 अक्टूबर को चारों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के अमृतसर निवासी गगनदीप सिंह (26), रजत कुमार (19) और गुरदासपुर निवासी क्रिश (21) के रूप में हुई है। इनके साथ एक बाल अपचारी को भी पुलिस निगरानी में लिया गया है। एटीएस की शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पाकिस्तानी हैंडलर राणा भाई ने उन्हें लखनऊ में किसी पुलिसकर्मी या सेना के जवान की हत्या करने का टास्क दिया था। इसके साथ ही वारदात का वीडियो बनाकर उसे भेजने के निर्देश दिए गए थे।

आरोपियों के मुताबिक, इस काम को अंजाम देने के बाद उन्हें तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। आरोपियों ने बताया कि वे 27 अक्टूबर को पंजाब के अमृतसर से दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे लखनऊ पहुंचे थे। वे इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए राणा भाई के संपर्क में थे। हैंडलर ने उन्हें लखनऊ पहुंचने के लिए 2,585 रुपये भेजे थे। यहां पहुंचने के बाद उसके निर्देश पर उन्होंने लखनऊ रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाकर उसे भेजा था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि राणा भाई ने पाकिस्तान से हथियार और कारतूस भेजने की बात कही थी।

लखनऊ पहुंचने पर एक स्थानीय व्यक्ति के जरिए आरोपियों को पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराए गए। हैंडलर ने उनके खर्च के लिए दो दिनों में 2,500-2,500 रुपए भी भेजे थे। आरोपियों को वारदात के बाद पुलिस से बचने के लिए नेपाल भागने और वहां मौज-मस्ती करने का लालच भी दिया गया था। एटीएस की प्राथमिक जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से वर्चुअल नंबर के जरिए संचालित व्हाट्सएप अकाउंट और विदेशी नंबरों के साथ बातचीत के साक्ष्य मिले हैं।

मोबाइल की जांच में संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है। आरोप है कि इन स्थानों की लोकेशन पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी गई थी। इस मामले में थाना एटीएस, लखनऊ में मुकदमा संख्या 16/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 152 और 61(2), आयुध अधिनियम की धारा 3/25 तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 और 38 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एटीएस अब इस साजिश से जुड़े अन्य लोगों, स्थानीय सहयोगियों, हथियारों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल कर रही है। आरोपियों से आगे की पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की कार्रवाई भी की जाएगी।

--आईएएनएस

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