लखनऊ अग्निकांड: एसआईटी और एफएसएल की संयुक्त जांच शुरू, राजनीतिक बयानबाजी तेज
लखनऊ, 23 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड की जांच मंगलवार को औपचारिक रूप से शुरू हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की।
जांच के मद्देनजर पूरी इमारत को सील कर दिया गया है। जांच एजेंसियां आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और संभावित लापरवाही के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इससे पहले सोमवार देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक की थी। बैठक में हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए गए।
वहीं, अलीगंज थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को सदस्य बनाया गया है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। घटनास्थल पर पहुंचे एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसआईटी सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की भूमिका और दायित्वों का विस्तार से परीक्षण किया जाएगा तथा तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी। इस बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उन्होंने बताया कि चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ब्रजेश पाठक ने कहा, “सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। हादसे में घायल दो लोगों का उपचार चल रहा है और दोनों खतरे से बाहर हैं।” वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी गठन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े हादसों के बाद जांच समितियों का गठन तो किया जाता है, लेकिन उनके परिणाम अक्सर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते।
उन्होंने आग से निपटने की व्यवस्थाओं, राहत एवं बचाव कार्य में हुई कथित देरी और संस्थान को पूर्व में मिले ध्वस्तीकरण नोटिस जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की। संजय सिंह ने कहा कि यदि संस्थान में सुरक्षा संबंधी खामियां पहले से चिह्नित थीं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए। गौरतलब है कि सोमवार को लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद मौके पर रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री ने दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों से वार्ता भी की थी।
--आईएएनएस
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