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एलयू में यौन उत्पीड़न और पेपरलीक घोटाले में असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित, गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकारी

लखनऊ, 20 मई (आईएएनएस)। लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) में एक गंभीर विवाद सामने आया है। बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा और जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
 
एलयू में यौन उत्पीड़न और पेपरलीक घोटाले में असिस्टेंट प्रोफेसर निलंबित, गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकारी

लखनऊ, 20 मई (आईएएनएस)। लखनऊ विश्वविद्यालय (एलयू) में एक गंभीर विवाद सामने आया है। बीएससी थर्ड ईयर की छात्रा और जूलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. परमजीत सिंह के बीच हुई बातचीत का ऑडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

कार्यपरिषद की आपात बैठक में यह फैसला लिया गया। तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट में डॉ. परमजीत सिंह को प्रथमदृष्टया चार गंभीर आरोपों में दोषी पाया गया है। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी शिक्षक पर छात्रा को पेपर लीक का लालच देकर यौन शोषण का प्रयास करने, शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन, मानसिक उत्पीड़न और गोपनीय परीक्षा जानकारी साझा करने के आरोप हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष गोपनीय परीक्षा सूचना साझा करने की बात स्वीकार की है।

ऑडियो वायरल होने के बाद अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े छात्रों ने कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक की तहरीर पर हुसैनगंज पुलिस स्टेशन में पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपी शिक्षक को कैंपस से हिरासत में लेकर अगले दिन जेल भेज दिया।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि आरोपी के आचरण से संस्थान की साख, सामाजिक प्रतिष्ठा और अकादमिक निष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। रिपोर्ट में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2015 के विनियमों और विशाखा गाइडलाइंस का उल्लंघन भी दर्ज किया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. परमजीत सिंह को आरोप पत्र जारी कर 15 दिनों के अंदर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनकी सेवा समाप्ति यानी बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है। छात्रों में आक्रोश है और कई संगठन शिक्षक की बर्खास्तगी की मांग कर रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि महिला सुरक्षा और परीक्षा की शुचिता बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम