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लोकायन 2026: न्यूयॉर्क की हडसन नदी पर लहराया भारतीय तिरंगा

नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस) वह पल भारतीय नौसेना और देश की समुद्री परंपराओं के लिए एक विशेष क्षण बन गया, जब भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित सेल ट्रेनिंग पोत ‘आईएनएस सुदर्शिनी’ ने अमेरिका के न्यूयॉर्क बंदरगाह में प्रवेश किया। विश्व के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक न्यूयॉर्क की ऐतिहासिक हडसन नदी पर आयोजित भव्य परेड ऑफ सेल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने गर्व के साथ भारतीय तिरंगा फहराया और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया।
 

नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस) वह पल भारतीय नौसेना और देश की समुद्री परंपराओं के लिए एक विशेष क्षण बन गया, जब भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित सेल ट्रेनिंग पोत ‘आईएनएस सुदर्शिनी’ ने अमेरिका के न्यूयॉर्क बंदरगाह में प्रवेश किया। विश्व के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक न्यूयॉर्क की ऐतिहासिक हडसन नदी पर आयोजित भव्य परेड ऑफ सेल के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने गर्व के साथ भारतीय तिरंगा फहराया और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रदर्शन किया।

गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी 10 महीने की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा पर है। तीन मस्तूलों वाला यह सुंदर पोत जब न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित स्काईलाइन के सामने से गुजरा, तो वह केवल एक नौसैनिक जहाज नहीं था, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी भारत की समुद्री परंपराओं, साहसिक समुद्री यात्राओं और वैश्विक संपर्कों का जीवंत प्रतीक बन गया। भारतीय तिरंगे से सुसज्जित आईएनएस सुदर्शिनी ने दुनिया को याद दिलाया कि भारत का समुद्रों से संबंध प्राचीन सभ्यताओं और ऐतिहासिक व्यापार मार्गों तक फैला हुआ है।

आईएनएस सुदर्शिनी की यह न्यूयॉर्क यात्रा उसके महत्वाकांक्षी ‘लोकायन 2026’ अभियान का हिस्सा है। यह 10 महीने लंबे अंतर-महासागरीय अभियान भारतीय नौसेना की उस सोच को दर्शाता है, जिसके तहत समुद्रों को केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मित्रता, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में भी देखा जाता है। इस अभियान का उद्देश्य विभिन्न देशों के साथ समुद्री संबंधों को मजबूत करना, नौसैनिक सहयोग को बढ़ावा देना और भारत की समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है।

अपनी यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी कई देशों के बंदरगाहों का दौरा कर रहा है। इस यात्रा में विभिन्न नौसेनाओं तथा समुद्री संस्थाओं के साथ यह भारतीय दल महत्वपूर्ण संवाद स्थापित कर रहा है। न्यूयॉर्क में आईएनएस सुदर्शिनी की उपस्थिति एक विशेष अवसर से भी जुड़ी है। अमेरिका इस वर्ष अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है, जिसके उपलक्ष्य में यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 और सेल फोर्थ 250 जैसे भव्य समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

इन समारोहों में दुनिया भर से आए नौसैनिक और प्रशिक्षण पोत भाग ले रहे हैं। ऐसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व करना भारतीय नौसेना की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और भारत-अमेरिका समुद्री सहयोग की मजबूती का प्रतीक है। न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका के नॉरफॉक और बाल्टीमोर में आयोजित सेल 250 कार्यक्रमों में भी सफल भागीदारी की थी। इन कार्यक्रमों के दौरान जहाज ने भारत की समुद्री परंपराओं, नौसैनिक प्रशिक्षण प्रणाली और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत किया।

अब यह पोत ब्रुकलिन में तैनात है, जहां हजारों दर्शक और समुद्री विशेषज्ञ इसे करीब से देख रहे हैं। जहाज की पारंपरिक संरचना और भव्य स्वरूप लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा केवल एक औपचारिक नौसैनिक कार्यक्रम नहीं है। यह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते विश्वास, सहयोग और समुद्री साझेदारी का भी प्रतीक है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार मिलकर काम कर रहे हैं। न्यूयॉर्क में आईएनएस सुदर्शिनी की मौजूदगी इस बात का संदेश देती है कि समुद्र व्यापार और सुरक्षा मार्ग के साथ साथ देशों को जोड़ने, संस्कृतियों को करीब लाने और वैश्विक मित्रता को मजबूत करने का भी माध्यम हैं।

अटलांटिक महासागर की विशाल लहरों को पार कर न्यूयॉर्क पहुंचे आईएनएस सुदर्शिनी ने भारत की समुद्री पहचान के इतिहास, वर्तमान और भविष्य की भी शक्ति को रेखांकित किया है। लोकायन 2026 अभियान के माध्यम से भारतीय नौसेना विश्व के महासागरों में भारत की गौरवशाली समुद्री परंपराओं, मित्रता और सहयोग के संदेश को आगे बढ़ा रही है। हडसन नदी पर लहराता भारतीय तिरंगा और उसके नीचे गर्व से खड़ा आईएनएस सुदर्शिनी दुनिया को यही संदेश दे रहा है कि भारत समुद्री सहयोग, वैश्विक साझेदारी और साझा प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है, और उसकी समुद्री विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायक है जितनी सदियों पहले थी।

--आईएएनएस

जीसीबी/पीएम