लोक कलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना समय की मांग, संस्कृति बची तो पहचान बचेगी: राज्यपाल
लखनऊ, 5 जून (आईएएनएस)। आधुनिकता और तकनीकी बदलाव के दौर में लोक संगीत, लोक नृत्य और लोक परंपराओं को केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहने दिया जा सकता। संस्कृति किसी समाज की विरासत भर नहीं, बल्कि उसकी पहचान और अस्तित्व का आधार होती है, इसलिए कला और संस्कृति के संरक्षण को जन-जन का दायित्व बनाना होगा। यह संदेश उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संगीत नाटक अकादमी सम्मान समारोह-2026 के अवसर पर दिया।
वहीं, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लोक कलाकार हमारी सनातन सांस्कृतिक विरासत के वास्तविक संरक्षक हैं और सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। जन भवन स्थित गांधी सभागार में आयोजित उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सम्मान समारोह-2026 में वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2024 के लिए चयनित 51 विशिष्ट कलाकारों को संगीत, नृत्य, नाटक और लोककलाओं के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राज्यपाल का संदेश पढ़कर सुनाया।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने संदेश में कहा कि कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के नैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्थान का सशक्त साधन है। कला अतीत की धरोहर होने के साथ-साथ भविष्य की प्रेरणा भी है, जो पीढ़ियों तक समाज को दिशा देने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि लोकगीत, लोकनाट्य और लोकसंगीत किसी भी सभ्यता की आत्मा होते हैं, और इन्हीं के माध्यम से समाज की सांस्कृतिक चेतना जीवित रहती है।
उन्होंने चिंता जताई कि तकनीकी क्रांति और बदलती जीवनशैली के कारण नई पीढ़ी का झुकाव तेजी से बदल रहा है, जिससे लोक परंपराएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसे समय में उन कलाकारों और साधकों का सम्मान बेहद आवश्यक है, जो अपनी साधना और समर्पण से इन परंपराओं को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृति केवल विरासत नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व भी है, और यदि आज इसे सहेजने में चूक हुई, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी।
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की सराहना करते हुए कहा कि अकादमी ने लोक संगीत और लोकनाट्य परंपराओं के संरक्षण के लिए 5,500 घंटे से अधिक दुर्लभ ऑडियो-वीडियो दस्तावेज सुरक्षित किए हैं। साथ ही कत्थक, नाट्य कला और लोक विधाओं के संवर्धन के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि ज्ञान, आध्यात्मिकता और सनातन सांस्कृतिक मूल्यों की विश्वव्यापी धरोहर है। भारतीय कलाकारों और लोक परंपराओं के देश की सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कलाकारों और लोक कलाओं के संरक्षण एवं प्रोत्साहन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लोक कलाकारों के सम्मान, संरक्षण और विकास के लिए सरकार हरसंभव सहयोग देगी। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस का उल्लेख करते हुए लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होकर पौधारोपण और उसके संरक्षण का संकल्प लेने का भी आह्वान किया।
--आईएएनएस
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