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ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर पर एनडीए नेता बोले, 'लोगों का गुस्सा सामने आ रहा'

पटना, 13 जून (आईएएनएस)। टीएमसी के बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के दावों पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।
 
ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर पर एनडीए नेता बोले, 'लोगों का गुस्सा सामने आ रहा'

पटना, 13 जून (आईएएनएस)। टीएमसी के बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के दावों पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि पूरे देश में कांग्रेस और टीएमसी जैसी पार्टियों ने जिस तरह का माहौल बनाया है, उसी का परिणाम है कि ये सभी पार्टियां पतन की ओर जा रही हैं।

ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के मामले को लेकर दिलीप जायसवाल ने कहा कि ममता बनर्जी का दिन पूरा हो गया है। जिस तरह से टीएमसी की गुंडागर्दी इतने लंबे समय से पश्चिम बंगाल में चल रही थी, बंगाल चुनाव परिणाम का दिन बंगाल की आजादी का दिन था। टीएमसी के लोगों ने भी जश्न मनाया कि ममता बनर्जी के तानाशाही से हमको छुट्टी मिल गई।

टीएमसी से निकाले गए ऋजु दत्ता के बयान पर उन्होंने कहा कि जब टीएमसी सत्ता में आई थी, तो पूरी कम्युनिस्ट पार्टी उसके साथ चली गई थी। अब फिर वही स्थिति बंगाल की बनती जा रही है और सभी लोग नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास कर रहे हैं।

मीनाक्षी नटराजन के आरोप पर दिलीप जायसवाल ने कहा कि खुद उनकी ओर से गलती की गई, उसके बाद ऐसी बातें बोली जा रही हैं। देश के पास इतना समय नहीं है कि फालतू बातों पर ध्यान दे।

वहीं, जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अब बिल्कुल साफ हो गया है कि टीएमसी औपचारिक विभाजन की ओर बढ़ गई है। ममता बनर्जी के लिए पार्टी या अभिषेक बनर्जी, दोनों में से तय करने का वक्त आ गया है। अगर वे फैसला नहीं ले पाती हैं तो पार्टी बचाना उनके बस का नहीं है।

ममता बनर्जी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने को लेकर राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि जब तक टीएमसी की सरकार थी, लोग डरे हुए थे। टीएमसी के किसी भी नेता के खिलाफ उनकी हिम्मत नहीं होती थी कि शिकायत कर सके। हालात बदलने पर लोगों का गुस्सा खुलकर बाहर आ रहा है। यही वजह है कि इस तरह के एफआईआर हो रहे हैं।

मीनाक्षी नटराजन के बयान पर राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका से भी अगर कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन सहमत नहीं हैं तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रतिष्ठा का विषय बनाने की बजाय कांग्रेस को इस फैसले का सम्मान करना चाहिए।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम