लोकल से ग्लोबल की सशक्त उड़ान, गुजरात सरकार की हस्तकला सेतु योजना कारिगरों के लिए वरदान
गांधीनगर, 2 जून (आईएएनएस)। गुजरात की समृद्ध हस्तकला परंपरा की सदियों से देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान है। बदलते आर्थिक परिप्रेक्ष्य तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के समय में इन कारीगरों को सशक्त बनाना समय की बड़ी आवश्यकता बनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘विकास भी, विरासत भी’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे मंत्रों द्वारा परंपरागत कला विरासत को अधिक से अधिक प्रोत्साहन देने का विजन दिया है और गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल इस विजन को भली-भांति आगे बढ़ा रहे हैं।
प्रधानमंत्री के इसी विजन तथा परंपरागत कला विरासत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने वर्ष 2020 में ‘हस्तकला सेतु योजना’ (एचएसवाई) शुरू की थी, जो आज कला-कारीगरों के लिए मजबूत आर्थिक प्रोत्साहन का सेतु सिद्ध हुई है।
गुजरात में हस्तकला सेतु योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है, जिसके कारण राज्य के हजारों कारीगरों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। इस योजना का क्रियान्वयन कुटीर एवं ग्रामोद्योग आयुक्त के अधीनस्थ इंडस्ट्रियल एक्सटेंशन-कॉटेज (इंडेक्स्ट-सी) द्वारा किया जा रहा है, जबकि भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) ने इस योजना में नॉलेज पार्टनर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुरुआत में यह योजना 2019-20 से तीन वर्ष के लिए प्रस्तावित थी, परंतु कोविड-19 महामारी के चलते इसे 2025-26 तक विस्तृत किया गया। इस योजना पर राज्य सरकार द्वारा लगभग 58 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशाल दायरा है। यह योजना गुजरात के सभी 34 जिलों में लागू की गई है। योजनांतर्गत अब तक 21,690 से अधिक कारीगरों का पंजीकरण किया गया है, जिनमें 82 प्रतिशत महिलाएं हैं। सामाजिक समावेशिता की दृष्टि से भी यह योजना महत्वपूर्ण है, कारण कि लाभार्थियों में 21 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति तथा 34 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग के कारीगर शामिल हैं।
हस्तकला सेतु योजनांतर्गत कारीगरों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यापक प्रशिक्षण भी दिया गया है। 15,586 कारीगरों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 9,292 कारीगरों को उनके क्षेत्र से जुड़ा विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण मिला है। इसके अतिरिक्त, 70 से अधिक मास्टर ट्रेनर्स तथा 150 से अधिक मेंटर्स का नेटवर्क तैयार किया गया है, जो कारीगरों को निरंतर मार्गदर्शन दे रहा है।
बाजार के साथ कनेक्टिविटी इस योजना का सबसे मजबूत पहलू है। लगभग 9,300 कारीगरों को बीटूबी ऑर्डर द्वारा सीधे बाजार से जोड़ा गया है। इसके अलावा, 7 बीटूबी मीट तथा 4 फैशन शो द्वारा कारीगरों एवं डिजाइनरों के बीच सुदृढ़ संवाद स्थापित हुआ है। डिजिटल युग के अनुरूप 2,000 से अधिक कारीगरों को डिजिटल मार्केटिंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें अमेजन, फ्लिपकार्ट समर्थ, मीशो तथा इट्सी जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है।
इस योजना का आर्थिक प्रभाव भी बहुत प्रभावशाली रहा है। योजनांतर्गत अब तक 102.08 करोड़ रुपए की कुल बिक्री दर्ज हुई है और 50,000 से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। साथ ही, मौजूदा 5,900 से अधिक कारीगरों को अतिरिक्त सहायता एवं मार्गदर्शन मिला है।
यदि कारीगरों की आय की बात करें, तो हस्तकला सेवा सेतु योजना से पहले केवल 9 प्रतिशत कारीगर ही 15,000 रुपए से अधिक मासिक आय अर्जित कर पाते थे, जबकि आज यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हस्तकला को आय के मुख्य स्रोत के रूप में अपनाने वाले कारीगरों की संख्या भी 20 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, 73 प्रतिशत कारीगर अब प्रदर्शनियों तथा मेलों द्वारा सीधे बाजार तक पहुंच बना रहे हैं।
यद्यपि योजना के सफल क्रियान्वयन के दौरान कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। इनमें दस्तावेजों का अभाव, वित्तीय समन्वय में विलंब, आधुनिक टेक्नोलॉजी अपनाने में संकोच तथा प्रभावी मार्केटिंग तंत्र का अभाव प्रमुख हैं, परंतु गुजरात सरकार ने इन चुनौतियों को दूर करने के लिए टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, डिजाइन नवीनता, बाजार विविधता तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी को प्राथमिकता दी।
हस्तकला सेतु योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि कारीगरों के जीवन में परिवर्तन लाने वाली एक क्रांतिकारी पहल बनी है। इस योजना ने केवल रोजगार सृजन ही नहीं किया, बल्कि गुजरात की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की ओर यह कदम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
--आईएएनएस
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