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लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से कंट्रोल हो सकता है सर्वाइकल, जानें लक्षण, कारण और उपाय

मुंबई, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की डिजिटल जिंदगी में घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर गर्दन झुकाए काम करते रहना पड़ता है, जिससे गर्दन में दर्द होने लगता है। ऐसे में अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हर गर्दन दर्द एक जैसा नहीं होता। कुछ मामलों में यह साधारण मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से होता है, जबकि कई बार यह एक गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जिसे सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस कहा जाता है।
 
लाइफस्टाइल में छोटे बदलाव से कंट्रोल हो सकता है सर्वाइकल, जानें लक्षण, कारण और उपाय

मुंबई, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। आज की डिजिटल जिंदगी में घंटों मोबाइल और लैपटॉप पर गर्दन झुकाए काम करते रहना पड़ता है, जिससे गर्दन में दर्द होने लगता है। ऐसे में अक्सर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो हर गर्दन दर्द एक जैसा नहीं होता। कुछ मामलों में यह साधारण मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से होता है, जबकि कई बार यह एक गंभीर स्थिति का संकेत भी हो सकता है, जिसे सर्वाइकल स्पोंडिलाइटिस कहा जाता है।

दरअसल, यह समस्या रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से से जुड़ी होती है, जिसे सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है। यह हिस्सा सिर को सहारा देने और उसे घुमाने में मदद करता है। वैज्ञानिक रिसर्च बताते हैं कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, इस हिस्से की हड्डियां और डिस्क कमजोर होने लगती हैं। इसके अलावा, लंबे समय तक गलत पोस्चर में बैठना, लगातार स्क्रीन देखना और गर्दन को झुकाकर काम करना इस समस्या को और बढ़ा देता है। धीरे-धीरे यह स्थिति दर्द और अकड़न का कारण बन जाती है।

इसके लक्षणों की बात करें तो गर्दन में दर्द के साथ जकड़न, सिरदर्द, कंधों और हाथों तक फैलने वाला दर्द, झुनझुनी या सुन्नपन जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। कई बार नसों पर दबाव पड़ने की वजह से हाथों में कमजोरी भी महसूस होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को कंट्रोल करने का सबसे असरदार तरीका है सही पोस्चर अपनाना। जब हम लंबे समय तक गर्दन झुकाकर बैठते हैं तो रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि काम करते समय स्क्रीन आंखों के स्तर पर हो, पीठ सीधी रहे और गर्दन ज्यादा देर तक एक ही स्थिति में न रहे। छोटे-छोटे ब्रेक लेना और बार-बार अपनी बैठने की स्थिति को सुधारना भी काफी मददगार साबित होता है।

इसके अलावा, फिजिकल एक्टिविटी और एक्सरसाइज भी बेहद जरूरी मानी जाती है। हल्की स्ट्रेचिंग और मसल्स को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज से दर्द और अकड़न को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

लाइफस्टाइल में बदलाव भी इस समस्या से निपटने के लिए जरूरी है। भारी वजन उठाने से बचना, सही तकिए और गद्दे का इस्तेमाल करना, शरीर को सक्रिय रखना और वजन को नियंत्रित रखना रीढ़ की सेहत के लिए जरूरी माना जाता है। साथ ही, गर्दन को झटके से घुमाने या अचानक मूवमेंट करने से बचना चाहिए।

डॉक्टरों का कहना है कि अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो, हाथों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस हो या सामान्य उपायों से आराम न मिले, तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

--आईएएनएस

पीके/डीकेपी