Aapka Rajasthan

लीड रोल नहीं किया, लेकिन यादगार किरदारों के बादशाह रहे मकरंद देशपांडे, दर्शकों के दिलों में बनाई खास जगह

मुंबई, 5 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने कभी मुख्य भूमिका नहीं निभाई, लेकिन अपनी अदाकारी और हर किरदार में जान डालने की कला के चलते दर्शकों के दिलों में हमेशा जगह बना ली। इन्हीं कलाकारों में एक नाम है मकरंद देशपांडे का... जो फिल्मों, थिएटर और वेब सीरीज में अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं।
 
लीड रोल नहीं किया, लेकिन यादगार किरदारों के बादशाह रहे मकरंद देशपांडे, दर्शकों के दिलों में बनाई खास जगह

मुंबई, 5 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने कभी मुख्य भूमिका नहीं निभाई, लेकिन अपनी अदाकारी और हर किरदार में जान डालने की कला के चलते दर्शकों के दिलों में हमेशा जगह बना ली। इन्हीं कलाकारों में एक नाम है मकरंद देशपांडे का... जो फिल्मों, थिएटर और वेब सीरीज में अपने अलग अंदाज के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने कभी लीड रोल के तौर पर काम नहीं किया, लेकिन उनकी छोटी‑छोटी भूमिकाएं भी दर्शकों को काफी पसंद आईं। उनके अभिनय की ताकत और थिएटर के प्रति जुनून ने उन्हें इंडस्ट्री में खास पहचान दिलाई।

मकरंद देशपांडे का जन्म 6 मार्च 1966 को महाराष्ट्र के दहानू में हुआ। बचपन से ही उन्हें एक्टिंग में गहरी रुचि थी और कॉलेज के दिनों में ही उन्होंने थिएटर से जुड़ना शुरू कर दिया। उनका यह जुनून बाद में उनके करियर का सबसे बड़ा आधार बन गया।

मकरंद ने साल 1988 में आमिर खान की फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने लगातार कई फिल्मों में सहायक किरदार निभाए। 'सरफरोश', 'स्वदेश', 'सत्या', 'मकड़ी', 'डरना जरूरी है', 'घातक' जैसी फिल्मों में उनके किरदार दर्शकों के बीच यादगार रहे।

थिएटर उनके जीवन का एक अहम हिस्सा रहा। साल 1990 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद 1993 में मकरंद ने अंश थिएटर ग्रुप की स्थापना की, जिसमें उनके साथ के.के. मेनन भी जुड़े, और यह ग्रुप मुंबई के थिएटर जगत का एक मजबूत स्तंभ बन गया। मकरंद ने 50 से ज्यादा शॉर्ट प्ले और 40 से अधिक फुल‑लेंथ नाटक लिखे और डायरेक्ट किए। उनके नाटक 'सर सर सरला', 'जोक', 'मां इन ट्रांजिट', और 'पियक्कड़' दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए।

मकरंद ने सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उन्होंने कुल पांच फिल्में डायरेक्ट की हैं, जिनमें 'दानव', 'हनन', 'शाहरुख बोला खूबसूरत है तू', 'सोना स्पा' और 'शनिवार‑रविवार' शामिल हैं। उनके निर्देशन में बनी ये फिल्में दर्शकों और समीक्षकों दोनों के बीच सराही गईं।

टीवी और वेब की दुनिया में भी मकरंद ने अपने अभिनय का जादू दिखाया। वह शाहरुख खान के शो 'सर्कस' में नजर आए और 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'साराभाई वर्सेज साराभाई' जैसे लोकप्रिय टीवी शोज में भी काम किया। वेब शोज 'हंड्रेड', 'शूरवीर' और 'द फेम गेम' में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग का जादू बिखेरा।

मकरंद ने कई पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं। उन्हें साउथ इंडियन इंटरनेशनल मूवी अवार्ड में बेस्ट नेगेटिव रोल के लिए सम्मानित किया गया और मराठी फिल्म 'डागड़ी चौल' के लिए फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामांकित भी किया गया।

--आईएएनएस

पीके/डीकेपी