Aapka Rajasthan

लंदन में बोले मोहन भागवत, 'हिंदू केवल व्यक्ति नहीं, परिवार, समाज और मानवता का प्रतिनिधि है'

लंदन, 6 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में आयोजित 'एकता का जश्न' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू केवल एक व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह परिवार, समुदाय, समाज और पूरी मानवता से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि हिंदू केवल प्रकृति की पूजा नहीं करता, बल्कि उससे प्रेम भी करता है और यही प्रेम एकता, चरित्र निर्माण और संघ की कार्यप्रणाली की आधारशिला है।
 

लंदन, 6 सितंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने ब्रिटेन की राजधानी लंदन में आयोजित 'एकता का जश्न' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू केवल एक व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह परिवार, समुदाय, समाज और पूरी मानवता से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा कि हिंदू केवल प्रकृति की पूजा नहीं करता, बल्कि उससे प्रेम भी करता है और यही प्रेम एकता, चरित्र निर्माण और संघ की कार्यप्रणाली की आधारशिला है।

मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू चिंतन इस विचार पर आधारित है कि "अस्तित्व एक ही है, भले ही वह विविध रूपों में दिखाई देता हो।" उन्होंने कहा कि विविधताएं प्रकृति का स्वाभाविक हिस्सा हैं और उन्हें स्वीकार करना तथा सम्मान देना ही हिंदू विचारधारा का मूल है।

उन्होंने कहा कि यदि संघ को एक ही सिद्धांत में परिभाषित करना हो तो वह "अपनापन" है। उनके अनुसार अपनापन सभी के प्रति शुद्ध और सात्विक प्रेम है, जो हिंदू का पारंपरिक स्वभाव है। उन्होंने कहा कि विविधताओं को अस्तित्व की एकता के अलग-अलग श्रृंगार के रूप में देखना चाहिए।

भविष्य की पीढ़ी पर भरोसा जताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें नई पीढ़ी पर अधिक विश्वास है, क्योंकि उनमें दुनिया को बेहतर बनाने की इच्छा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लक्ष्य दीजिए, तरीका मत बताइए, वे सार्वभौमिक नैतिकता और समृद्धि के लक्ष्य को तेजी से हासिल कर लेंगे।

कार्यक्रम के दौरान ब्रिटेन में रहने वाले हिंदुओं की निष्ठा पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए भागवत ने कहा कि इसमें कोई टकराव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती भी है तो ब्रिटिश हिंदुओं की निष्ठा ब्रिटेन के साथ होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मभूमि वही होती है जहां व्यक्ति की निष्ठा होती है, जबकि जन्मभूमि और पुण्यभूमि वह हैं जहां से उसे अपने संस्कार और मूल्य मिलते हैं। उन मूल्यों को अपनी कर्मभूमि की सेवा में उतारना ही हिंदुत्व का संदेश है।

संघ के कार्यों का उल्लेख करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि स्वयंसेवक मानव जीवन के लगभग हर क्षेत्र में सक्रिय हैं, इसलिए उनके कार्यों का पूरा दायरा कुछ शब्दों में बताना कठिन है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से विरोध करने वाले लोग भी स्वयंसेवकों के कार्य और उनके गुणों को स्वीकार करते हैं तथा समय-समय पर महत्वपूर्ण विषयों पर संघ का सहयोग और संवाद भी चाहते हैं। उनके अनुसार यह समाज में संघ के कार्यों की व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

--आईएएनएस

डीएससी