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क्या मेनोपॉज आपकी जिंदगी को बना रहा है पहले से ज्यादा मुश्किल? अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। मेनोपॉज हर महिला की जिंदगी का एक प्राकृतिक चरण है, लेकिन कई बार इसके साथ आने वाले बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा और मुश्किल बना देते हैं। इस दौरान अचानक गर्मी लगना, मूड स्विंग, नींद ठीक से न आना, थकान महसूस होना या शरीर में भारीपन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कई महिलाएं इन बदलावों से घबरा जाती हैं, लेकिन थोड़ी-सी समझदारी और सही जीवनशैली अपनाकर इस समय को भी आरामदायक और संतुलित बनाया जा सकता है।
 
क्या मेनोपॉज आपकी जिंदगी को बना रहा है पहले से ज्यादा मुश्किल? अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। मेनोपॉज हर महिला की जिंदगी का एक प्राकृतिक चरण है, लेकिन कई बार इसके साथ आने वाले बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा और मुश्किल बना देते हैं। इस दौरान अचानक गर्मी लगना, मूड स्विंग, नींद ठीक से न आना, थकान महसूस होना या शरीर में भारीपन जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। कई महिलाएं इन बदलावों से घबरा जाती हैं, लेकिन थोड़ी-सी समझदारी और सही जीवनशैली अपनाकर इस समय को भी आरामदायक और संतुलित बनाया जा सकता है।

सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। इस समय शरीर को पोषण की ज्यादा जरूरत होती है, इसलिए संतुलित और हल्का भोजन लेना फायदेमंद रहता है। अपने खाने में ताजे और मौसमी फल जरूर शामिल करें। ये शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल देते हैं और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा गेहूं, पुराना चावल और मूंग दाल जैसे हल्के और पौष्टिक अनाज भी अपने आहार में शामिल कर सकते हैं। थोड़ी मात्रा में घी का सेवन भी शरीर को ताकत देता है और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

मेनोपॉज के समय केवल भोजन ही नहीं, बल्कि दिनचर्या भी बहुत मायने रखती है। अगर आप रोज थोड़ा समय योग और ध्यान के लिए निकालती हैं तो तन और मन दोनों को काफी राहत मिल सकती है। योगासन शरीर की जकड़न कम करने, लचीलापन बढ़ाने और तनाव को कम करने में मदद करते हैं। वहीं ध्यान करने से मन शांत होता है और मूड स्विंग जैसी समस्याएं भी कम महसूस होती हैं। कई बार महिलाएं इस समय ज्यादा तनाव या बेचैनी महसूस करती हैं, ऐसे में नियमित ध्यान और गहरी सांस लेने के अभ्यास बहुत लाभकारी साबित हो सकते हैं।

सांस से जुड़े आसान व्यायाम भी शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। रोज कुछ मिनट गहरी और धीमी सांस लेने का अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बेहतर होती है और मन भी हल्का महसूस करता है। इसके साथ ही हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि जैसे सुबह-शाम टहलना भी आदत में शामिल करना अच्छा रहता है। इससे शरीर एक्टिव रहता है और नींद भी बेहतर आने लगती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि मेनोपॉज को किसी बीमारी की तरह नहीं, बल्कि जीवन के एक स्वाभाविक बदलाव के रूप में समझें। इस समय अपने शरीर की जरूरतों को समझना और खुद का थोड़ा ज्यादा ख्याल रखना बेहद जरूरी है। आयुर्वेद कहता है कि सही खान-पान, नियमित योग-ध्यान और सकारात्मक सोच के साथ इस दौर को भी स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित तरीके से जिया जा सकता है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस