Aapka Rajasthan

कुरुक्षेत्र में कश्मीरी स्लीपर बस पर हमले से भड़के ट्रांसपोर्टर, बोले-यहां होता तो हम जेल में होते

कुपवाड़ा, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कश्मीर जा रही एक स्लीपर बस पर हुए हमले को लेकर घाटी के ट्रांसपोर्टरों में भारी आक्रोश है। कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़ितों को मुआवजा और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
 

कुपवाड़ा, 18 अक्टूबर (आईएएनएस)। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में कश्मीर जा रही एक स्लीपर बस पर हुए हमले को लेकर घाटी के ट्रांसपोर्टरों में भारी आक्रोश है। कश्मीर ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, पीड़ितों को मुआवजा और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

मीर मोहम्मद शफी ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक बस पर नहीं बल्कि कश्मीर के पूरे ट्रांसपोर्ट समुदाय पर हमला है। इस मामले में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का किया गया सोशल मीडिया पोस्ट काफी नहीं है बल्कि इस मामले में ठोस और जमीनी कार्रवाई होनी चाहिए।

फेडरेशन अध्यक्ष मीर मोहम्मद शफी ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि जैसे ही घटना की खबर सामने आई, उन्होंने कश्मीर बस और स्लीपर बस एसोसिएशन के अध्यक्ष इमरान बक्शी से बात की। वह काफी परेशान थे। इस घटना के बाद वह रात भर सो नहीं पाए। उन्होंने लगातार कॉल किए। हमारी पूरी टीम परेशान थी।

शफी ने हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा, "क्या कश्मीरी अब कहीं काम नहीं कर सकता? क्या कश्मीरी अब बाहर गाड़ी लेकर नहीं जा सकता? हम पूछना चाहते हैं कि आखिर जम्मू-कश्मीर की गाड़ियों को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? इसके पीछे क्या कारण है?"

मीर शफी ने दोहरे मापदंड पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर ये घटना कश्मीर में हुई होती, तो हम लोग जेल में होते। हम पर पीएसए लगा दिया गया होता लेकिन वहां जिस व्यक्ति ने पिस्टल लहराई, लोगों को लाया और बस पर हमला किया, उसके खिलाफ अभी तक कोई एफआईआर दर्ज होने की सूचना भी हमें नहीं दी गई है।"

उन्होंने कहा, "हमने भाईचारा हमेशा निभाया है। जब यहां हालात खराब थे, तब भी बाहर से ड्राइवर गाड़ी लेकर यहां आते थे लेकिन हमने आज तक एक भी गाड़ी पर खरोंच तक नहीं आने दी। हमारे साथ क्या हुआ, सबने देखा। अगर इस तरह की घटनाएं नहीं रुकीं, तो इसका असर भाईचारे पर पड़ सकता है। आज अगर हम इस पर चुप बैठेंगे तो कल किसी और के साथ होगा। अगर कल हमने यहां गाड़ियां रोकनी शुरू कर दीं तो फिर भाईचारा भी खतरे में पड़ जाएगा लेकिन हम भाईचारे को खतरे में नहीं डालना चाहते।"

ट्रांसपोर्टर्स फेडरेशन ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार, गृह मंत्री और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से इस मामले में दखल देने की अपील की है। मीर शफी ने कहा, "हमें इंसाफ दिलाया जाए। आखिर यह हुआ क्या, कैसे हुआ, क्यों हुआ, यह सब बताया जाए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो इसका जो भी नतीजा होगा, उसकी जिम्मेदार सरकार होगी।"

उन्होंने कहा, "अगर रास्ते में पत्थर मारे जाएंगे तो पैसेंजर हमारी गाड़ियों में कैसे बैठेगा? उसको डर लगेगा। कौन बैठेगा हमारी बस में? हमारा रोजगार इसी पर टिका है।" मीर मोहम्मद शफी ने सभी ट्रांसपोर्ट संगठनों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे वह दिल्ली के ट्रांसपोर्टर हों, हरियाणा के हों या जम्मू के, सभी को इस मुद्दे पर आगे आना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि इस हमले में जो लोग जख्मी हुए हैं, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और बस को हुए नुकसान की भरपाई की जाए।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम