क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम
बीजिंग, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। बीते 21 अप्रैल को चीन-भारत के रिश्तों में नया अध्याय लिखा गया, जब चीन की प्रमुख हवाई सेवा कंपनी एयर चाइना ने पेइचिंग और दिल्ली के बीच सीधी उड़ान सेवाएं शुरू कर दी।
इसके पहले कोलकाता और शांगहाई के बीच भारतीय विमान सेवा कंपनी इंडिगो ने बीते तीस मार्च को शांगहाई और कोलकाता के बीच सीधी उड़ान शुरू की थी। यह सेवा दोनों ओर के यात्रियों के लिए रोजाना उपलब्ध है। पेइचिंग से दिल्ली की सीधी उड़ान सेवा को शांगहाई-दिल्ली उड़ान का विस्तार माना जा रहा है, जिसे नवंबर 2025 में फिर से शुरू किया गया था।
पेइचिंग और दिल्ली के बीच शुरू हुई इस सीधी हवाई सेवा को दोनों देशों के व्यापारिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और आर्थिक रिश्तों के लिए बेहतर कदम माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि इस महत्वपूर्ण हवाई संपर्क की बहाली से दोनों देशों के सैलानियों, छात्रों और कारोबारियों की यात्रा आसान होगी। इसके साथ ही दोनों देशों के लोगों के आपसी रिश्तों को बेहतर और मजबूत बनाने में यह कदम कारगर साबित होगा।
भारत स्थित चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने जब इस सीधी उड़ान सेवा की बहाली की घोषणा की तो दिल्ली में इसे सकारात्मक संदेश के रूप में लिया गया। यूं जिंग का घोषणा करते वक्त यह कहना कि यह उड़ान बहाली “मजबूत और आत्मविश्वास से भरी शुरुआत” है, इस संपर्क सेवा की महत्ता को ही प्रमाणित करता है। फिलहाल यह सेवा यानी पेइचिंग-दिल्ली उड़ान सप्ताह में तीन दिन यानी मंगलवार, शुक्रवार और रविवार को ही उपलब्ध होगी। जिसमें बड़े विमानों मसलन, एयरबस ए 330-200/300 विमानों का ही उपयोग किया जा रहा है।
इसके पहले बीते 18 अप्रैल को चीन के दक्षिण-पश्चिमी युन्नान प्रांत के खुन मिंग और पूर्वी भारत के प्रमुख शहर कोलकाता के बीच चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने सीधी उड़ान फिर से शुरू कर दी है। लगातार बढ़ रही इन उड़ानों से साफ है कि दोनों देशों के नागरिकों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक रिश्ते बेहतरी की ओर बढ़ रहे हैं। दोनों देश एक-दूसरे के पड़ोसी हैं और उनका सांस्कृतिक रिश्ता प्राचीन काल से ही रहा है, इसलिए इन उड़ानों को भरोसा और रिश्ता बहाली की दिशा में बड़ा कदम माना जा सकता है।
इन उड़ानों की बहाली से जहां दोनों देशों को कारोबारी एक-दूसरे के यहां जा सकेंगे और अपने कारोबार को नई गति दे सकेंगे, वहीं छात्रों के आवागमन से दोनों देशों के बीच शैक्षिक व्यवहार भी बढ़ेगा। दोनों देशों के छात्र अपने हिसाब से अपनी पसंदीदा पढ़ाई के लिए एक-दूसरे देश की यात्रा कर सकेंगे। इसके साथ ही दोनों देशों में पर्यटन भी बढ़ेगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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